राज्य निर्वाचन आयोग से पूछे गए सवाल के अलावा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी समर्पित अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट 10 जुलाई को पेश करने का निर्देश भी दिया।पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख़्ती दिखाई है और कोर्ट ने चुनाव आयोग को साफ निर्देश दिया है कि वह अदालत को बताए कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव किस तारीख को कराए जाएंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले पर भी सवाल पूछा है।उत्तर प्रदेश सरकार ने ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दी। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण तय किया जाएगा। इसके बाद पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो सकेगा। प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है, तो ऐसे में लग नहीं रहा है कि इस साल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो पाएंगे, क्योंकि सरकार ने जिस आयोग का गठन किया है, उसका कार्यकाल ही छह महीने का है। प्रदेश में पंचायत चुनाव अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही हो पाएंगे। प्रदेश के ग्राम प्रधानों के संगठन पिछले काफी समय से समय पर चुनाव कराने की मांग कर रहे थे और उसे लेकर वो लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे और सरकार को ज्ञापन भेज रहे थे। अप्रैल के अंतिम हफ्ते में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने पंचायत चुनाव के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग के गठन की समय सीमा पर सफाई मांगी थी। अगली सुनवाई से ठीक एक दिन पहले समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई। आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी आरक्षण दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया में भी समय लगेगा इसके बाद ग्राम प्रधानों, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों का आरक्षण तय होगा।


