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राजीव ठाकुर ने वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट में अपने दुखों को कॉमेडी में बदलने की सलाह के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा- ‘अक्सर लोग कॉमेडियन को सलाह देते हैं कि अपने संघर्ष और दुखों को स्टैंड अप मैटेरियल में बदलो, लेकिन मैं जब भी ऐसा करने की कोशश करता था, मेरी बचपन की यादें ताजा हो जाती थीं और कई बार तो मैं स्टेज के पीछे जाकर रोने लगता था। एक्टर ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि उनका बचपन कितना मुश्किलों भरा रहा। वह एक कमरे के घर में पले-बढ़े  और उनका बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। अभिनेता ने अपने घर के बारे में बात करते हुए कहा कि उनका घर किसी ‘पब्लिक टॉयलेट जैसा लगता था।राजीव ने अपने संघर्षों को याद करते हुए कहा – ‘ये पूरी तरह से फिल्मी कहानी जैसा था। मम्मी-पापा की शादी के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया था और वे रातों-रात आरामदायक घर से एक कमरे वाले घर में आ गए। उस एक कमरे में ही हमारा बेडरूम, किचन, लिविंग रूम और बाथरूम था। वहीं हम तीन भाई-बहन पैदा हुए और पले-बढ़े। बाथरूम भी एक ही था तो अगर कोई नहा रहा होता था तो बाकि के 4 लोगों को बाहर ही इंतजार करना पड़ता था। ऐसा लगता था, जैसे कोई पब्लिक टॉयलेट है।

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