सोनम वांगचुक ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवज़ा दिया जाए। जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल हो।
पुलिस द्वारा ज़्यादती और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के बावजूद 20 जुलाई 2026 का ‘चलो संसद’ मार्च बहुत शांतिपूर्ण रहा। पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक विरोध के प्रति उनके धैर्य और प्रतिबद्धता को देखा। मुझे पूरी उम्मीद है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस भरोसे को किसी भी कानूनी मामले, उत्पीड़न या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई से कमज़ोर नहीं किया जाएगा।वांगचुक ने पत्र में लिखा, अस्पताल में आपसे मिलने के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने मुझे पत्र लिखा है। कुछ लोग पहले ही आ चुके हैं और बाकी के आज शाम तक आने की उम्मीद है। उन सभी ने मुझसे अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया है और याद दिलाया है कि मुझे अभी देश की सेवा में बहुत काम करना है। मैं उनसे सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में लौटना चाहता हूं जिसने मेरे जीवन को एक पहचान दी है। लेकिन मैं उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।पेपर लीक के मामले पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। वांगचुक ने पत्र में लिखा है कि अगर केंद्र सरकार उनकी मांगों को लेकर उन्हें भरोसा दिलाए तो वे अपना अनशन खत्म कर देंगे।

