सरकार का कहना है कि समाज में स्वस्थ माहौल बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इस दिशा में जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है. कला एवं संस्कृति विभाग ने अपने पत्र में बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का भी उल्लेख किया है. विभाग का कहना है कि बिहार की लोक कलाएं, लोक गीत और क्षेत्रीय भाषाएं राज्य की पहचान हैं. ऐसे में अश्लील और आपत्तिजनक गीतों के बढ़ते चलन से इनकी गरिमा को नुकसान पहुंच सकता है.बिहार की सम्राट सरकार अब अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. इसको लेकर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने गृह विभाग को एक पत्र भेजा है. विभाग ने मांग की है कि ऐसे गानों के सार्वजनिक प्रसारण और कार्यक्रमों में बजाने पर रोक लगाई जाए. साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए. कला एवं संस्कृति विभाग का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अश्लील और द्विअर्थी गानों का चलन काफी बढ़ गया है. शादी-ब्याह, जुलूस, मेलों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में ऐसे गाने अक्सर सुनाई देते हैं. विभाग का मानना है कि इन गीतों का समाज पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ रहा है.


