GenZ के नाम संदेश में PM मोदी ने कहा, ‘हाय फ्रेंड्स, आज तो मन करता है बस आपसे ही बातें करूं। जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ देश और दुनिया ने देखा है। कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी-भद्दी गालियां बोलीं। किसी भी सभ्य समाज को शोभा ना दे, ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया। मुझे तो गालियां दी गईं, मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियां दी गईं। ना जाने कितना भद्दा स्वरूप था।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘लेकिन, मैं आज बात करना चाहता हूं कि बचपन में गलतियां होती हैं। और बचपन में गलतियों से सुधरने का अवसर भी होता है। और यही तो बचपना है। और इसलिए, मैं समाज के अंदर, जो आक्रोश है उसको भली भांति समझ सकता हूं। एक कल्चरल शॉक है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा कैसे बोल सकती हैं। लेकिन समय है, इन बच्चों को गले लगाकर के, राह दिखाने का। ये गुमराह बच्चे हैं। उनको राह दिखाना हमारा काम है। उनको सजा देना, अदालतों के चक्कर कटवाना, समाज में उनको प्रताड़ित करना, इससे हम परिस्थितियां नहीं बदल पाएंगे।PM मोदी ने आगे कहा, ‘मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। समाज भी मेरी इस बात को स्वीकार करे। क्योंकि मेरे मन में एक ही भाव है। कभी-कभी, दांतों तले हमारी जीभ आ जाती है, खून निकल आता है। लेकिन हम दांत तोड़ते नहीं हैं, क्योंकि दांत भी हमारे हैं, जीभ भी हमारी है। बच्चे भी हमारे हैं। उन्हें राह दिखाना हमारा काम है। गुमराह को राह दिखाना कठिन होता है, लेकिन कठिन काम हमको करना है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने नए वीडियो में कहा कि मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं। मैं बच्चों को अदालत का चक्कर नहीं कटवाना चाहता हूं। बचपन में गलतियां होती हैं। मैं आपके आक्रोश को समझता हूं। गुमराह को राह दिखाना कठिन लेकिन मैं ये काम करूंगा।

