राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ परीक्षा को प्रभावित नहीं करता, बल्कि छात्रों की मेहनत, आत्मविश्वास, भरोसा, सपने और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं हो सकता। उन्होंने कहा जैसे कैंसर का इलाज सिर्फ क्रोसिन से नहीं किया जा सकता, वैसे ही पेपर लीक जैसी बीमारी का इलाज केवल मीडिया में बयान देने से नहीं होगा। इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था और कानून की जरूरत थी, जिसे सरकार इस नए कानून के जरिए लागू कर रही है।’देश में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों के बीच संसद में पब्लिक एग्जामिनेशंस अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने छात्रों के मुद्दे को विस्तार से उठाया। उन्होंने कहा कि यह कानून भारत का पहला व्यापक एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। राघव चड्ढा ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। कई छात्र रोज 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं, जबकि परीक्षा केवल 1 से 3 घंटे की होती है। लेकिन अगर एक कैमरा फोन से फोटो खींचकर, व्हाट्सऐप पर एक मैसेज या टेलीग्राम पर एक PDF के जरिए रातों-रात पेपर लीक हो जाए, तो छात्रों की पूरी मेहनत, सपने और भविष्य खतरे में पड़ जाते हैं।

