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Wed. Jul 29th, 2026
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पुलिस का कहना है कि अगर आरोपी अपनी तैयार की हुई 967 APK फाइलें भी बेचने में सफल हो जाता, तो साइबर ठगी की रकम 100 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती थी। जांच में आरोपी के पास से 37,200 लोगों का बैंकिंग डेटा भी बरामद हुआ है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सिर्फ APK फाइलें ही नहीं बेचता था, बल्कि लोगों का व्यक्तिगत और बैंकिंग डेटा भी साइबर जालसाजों को उपलब्ध कराता था, ताकि वे आसानी से अपने शिकार चुन सकें।

पुलिस के अनुसार, आरोपी एक APK फाइल 15,000 से 20,000 रुपये में बेचता था। साथ ही खरीदार को उस APK फाइल का पूरा कंट्रोल भी देता था, ताकि कोई दूसरा उसका इस्तेमाल न कर सके। हर APK फाइल की वैधता 40 से 45 दिनों तक रहती थी।मुंबई पुलिस के डीबी मार्ग पुलिस थाने ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर जालसाजों को बेचता था। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वह अब तक 92 APK फाइलें साइबर अपराधियों को बेच चुका था, जबकि 967 APK फाइलें बनाकर तैयार रखी थीं। इन फाइलों को बेचने के लिए वह नए साइबर जालसाजों की तलाश कर रहा था।मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के मुताबिक, आरोपी द्वारा बेची गई 92 APK फाइलों का इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों ने करीब 63 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इन फाइलों से जुड़े मामलों में देशभर में 2,993 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई से हैं।

साइबर अपराधी इन APK फाइलों के लिंक लोगों को भेजकर उन्हें यह कहते थे कि गैस कंपनी का बिल बकाया है, RTO का चालान लंबित है, या इसी तरह के दूसरे बहाने बनाकर लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाते थे। जैसे ही पीड़ित लिंक पर क्लिक करता था, उसके मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाई जाती थी और उसके खाते से पैसे उड़ा लिए जाते थे।

डीबी मार्ग पुलिस थाने में दर्ज एक मामले में दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति से 70 हज़ार रुपये की ठगी इसी तरह की APK फाइल के जरिए की गई थी। शिकायत की जांच के दौरान पुलिस साइबर जालसाजों तक तो नहीं पहुंच सकी, लेकिन इस पूरे नेटवर्क के सबसे अहम खिलाड़ी, यानी APK फाइल बनाने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने में सफल रही।

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