आरोप है कि श्यामजी ने सीमा के सिर पर ईंट और डंडे से हमला किया था। इसके बाद वारदात को सड़क हादसे का रूप देने के लिए अज्ञात डीसीएम से टक्कर की कहानी गढ़ी गई। करीब एक साल तक मामला सड़क दुर्घटना के रूप में दर्ज रहा, लेकिन CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और एक अहम WhatsApp मैसेज ने पुलिस की जांच की दिशा बदल दी। पुलिस ने आरोपी भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से अपराध की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में करीब एक साल पहले हुई महिला की मौत का मामला अब सड़क हादसा नहीं, बल्कि हत्या निकला है। पुलिस की लंबी जांच के बाद सामने आया कि 32 वर्षीय सीमा देवी की मौत किसी अज्ञात डीसीएम की टक्कर से नहीं हुई थी। पुलिस के मुताबिक, सीमा की हत्या उसके सगे भाई श्यामजी पाल ने जमीन के विवाद में की थी।पुलिस के मुताबिक सीमा देवी सचेंडी क्षेत्र में अपनी मां और भाई श्यामजी पाल के साथ रहती थी। पिता कृष्ण पाल की मौत के बाद परिवार की करीब चार बीघा जमीन का बंटवारा चार हिस्सों में हुआ था। बाद में सीमा की मां ने अपने हिस्से की करीब एक बीघा जमीन गिफ्ट डीड के जरिए बेटी सीमा के नाम कर दी थी। यही जमीन बाद में भाई-बहन के विवाद की वजह बन गई। पुलिस के अनुसार श्यामजी चाहता था कि मां के हिस्से में आई जमीन सीमा उसके नाम कर दे, लेकिन सीमा इसके लिए तैयार नहीं थी। इसी बीच सीमा की शादी शिवली क्षेत्र के एक युवक से तय हो गई। शादी तय होने के बाद सीमा ने जमीन देने से इनकार कर दिया, जिससे दोनों के बीच विवाद और बढ़ गया।पुलिस की जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन सुबह भी सीमा और श्यामजी के बीच जमीन को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के बाद सीमा नाराज होकर पुलिस से शिकायत करने के लिए स्कूटी से घर से निकल गई। बताया गया कि घर से करीब एक किलोमीटर दूर श्यामजी ने सीमा को रोक लिया। दोनों के बीच फिर कहासुनी हुई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर श्यामजी ने ईंट और डंडे से सीमा के सिर पर हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद सीमा सड़क पर गिर गई। इसके बाद आरोपी वहां से चला गया।पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद वारदात को छिपाने के लिए श्यामजी ने सड़क दुर्घटना की कहानी तैयार की। उसने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को बताया कि अज्ञात डीसीएम ने सीमा की स्कूटी में टक्कर मार दी है। सूचना के आधार पर पुलिस ने अज्ञात डीसीएम चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआत में मामला सड़क हादसा माना गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनसे हादसे की कहानी पर संदेह होने लगा।पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान उस डीसीएम की पहचान करने का प्रयास किया गया, जिस पर टक्कर मारने का आरोप था। पुलिस ने संबंधित चालक से पूछताछ की तो उसने घटना के समय डीसीएम के फतेहपुर में होने के साक्ष्य उपलब्ध कराए। इस जानकारी के बाद पुलिस को शक हुआ कि सीमा की मौत वास्तव में सड़क हादसे में नहीं हुई थी। इसके बाद जांच का फोकस सीमा के आसपास मौजूद लोगों और खासकर उसके भाई श्यामजी पर गया।

