वाराणसी की साइबर क्राइम सेल और थाना चेतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी के इस मामले में बताया कि आरोपी XePay APK के जरिए मोबाइल में SMS Forwarding सक्रिय कर ओटीपी हासिल करते थे और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 19 चेकबुक, 40 डेबिट कार्ड, 48 QR स्कैनर और दो वाहन बरामद किए हैं। पुलिस अन्य खाताधारकों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है। एसीपी क्राइम विनय कुमार द्विवेदी ने इस मामले को लेकर बताया कि अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत, विशेष रूप से साइबर अपराधियों के खिलाफ जो अभियान चलाया जा रहा है उसके तहत 23 अगस्त को जनपद की साइबर क्राइम टीम एवं चेतगंज पुलिस के द्वारा संयुक्त प्रयास के द्वारा एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। इस गिरोह के द्वारा लोगों को बेवकूफ बना करके और उन्हें कमीशन के नाम पर उनके नाम से फर्जी फर्म खुलवाने, फर्जी फर्म खुलवाने के बाद उस फर्म के नाम से अकाउंट और अकाउंट से संबंधित अन्य जानकारी वह सारा ले लिया जाता था और जो खाते हैं। इन खातों को अपने ऊपर भेज करके विभिन्न तरीके से जो इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और गेमिंग ऐप्स के माध्यम से फ्रॉड किए जा रहे थे।सरगना की पहचान रोहतास, सासाराम बिहार निवासी नीतीश कुमार पाण्डेय के रूप में हुई है। यह गैंग कमीशन का लालच देकर लोगों के नाम पर फर्जी फर्म खुलवाता था और उनके बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और बेटिंग ऐप में करता था। पुलिस की जांच में आरोपियों से जुड़े 41 बैंक खातों में 143 एनसीआरपी शिकायतें मिली हैं जिनमें कुल 116.86 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।

