नए नियमों के मुताबिक, मंत्री अपने-अपने विभागों के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री को किसी भी विभाग की फाइल, दस्तावेज या संबंधित रिकॉर्ड सीधे मंगाने का अधिकार होगा। मुख्यमंत्री द्वारा मांगे गए दस्तावेज संबंधित मंत्री और विभाग के सचिव को बिना देरी उपलब्ध कराने होंगे।महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र शासन कार्यपद्धति नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंत्रियों के फैसलों की समीक्षा करने, उनमें बदलाव करने या उन्हें रद्द करने का स्पष्ट अधिकार दिया गया है। मुख्यमंत्री अगर यह मानते हैं कि किसी मंत्री का फैसला व्यापक सार्वजनिक हित में उचित नहीं है, तो वे उस फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। हालांकि, ऐसा करते समय मुख्यमंत्री को फैसले में बदलाव या उसे रद्द करने के कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा।नए नियमों से पहले कार्यपद्धति नियमों में मुख्यमंत्री के पास किसी विभाग के प्रभारी मंत्री के फैसले को अपनी ओर से सीधे बदलने, उसकी समीक्षा करने या उसे रद्द करने का स्पष्ट स्वतंत्र अधिकार नहीं था। 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले में भी इस स्थिति का उल्लेख किया गया था। पुरानी व्यवस्था में विभागीय मंत्री को अपने विभाग से जुड़े फैसलों में व्यापक स्वायत्तता हासिल थी। किसी फैसले को कैबिनेट के समक्ष लाने की स्थिति में ही सामूहिक स्तर पर उस पर पुनर्विचार होता था।
अब 2026 के नए नियमों ने मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों के अधिकारों की सीमा को अधिक स्पष्ट कर दिया है। इसके तहत सार्वजनिक हित में मुख्यमंत्री को किसी भी विभाग के मंत्री के फैसले की समीक्षा कर उसमें बदलाव या उसे रद्द करने की शक्ति मिलेगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जरूरत पड़ने पर मंत्रियों द्वारा लिए गए फैसलों में बदलाव या उन्हें रद्द कर सकेंगे.महाराष्ट्र में नए नियमों से बढ़ीं मुख्यमंत्री की शक्तियां

