प्रधानमंत्री ने डेटा को देश की राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार डेटा जुटाने, उसे सुरक्षित रखने और मैनेज करने में काफी संसाधन लगाती है, लेकिन विभागों के बीच तालमेल की कमी और अलग-अलग सिस्टम के कारण डेटा की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। PM मोदी ने कहा कि अलग-अलग उद्देश्यों के लिए डेटा जुटाने और मैनेज करने के तरीके भी अलग हैं। उन्होंने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे अलग-अलग विभागों के डेटा सिस्टम आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकें और डेटा का प्रभावी इस्तेमाल हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, सुरक्षा और विदेश मामलों के साथ-साथ शासन व्यवस्था से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के एजेंडे पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें सिर्फ तत्काल समस्याओं, आंकड़ों और मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें लंबे समय की सोच के साथ यह भी विचार करना चाहिए कि आने वाले वर्षों में देश का भविष्य किस तरह तैयार किया जाए।प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों के बीच काम करने की अलग-अलग व्यवस्था यानी ‘साइलो’ की समस्या पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइलो सिर्फ संगठन से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह सोच से जुड़ी समस्या भी है। यह समस्या विभागों के बीच क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों स्तरों पर हो सकती है। PM मोदी ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों की पूरी जिम्मेदारी लेने और देश के प्रति अपनापन रखते हुए काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज में ‘पूरी सरकार एक साथ’ वाली सोच होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान अलग-अलग विभागों के अधिकारियों ने मिलकर प्रभावी ढंग से काम किया।

