दिल्ली :इन पार्टियों ने 2019 के बाद से एक भी चुनाव नहीं लड़ा था और न ही इनके दफ्तरों का कोई भौतिक पता मिल सका।चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए 334 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों यानी कि RUPP का पंजीकरण रद्द कर दिया। इन पार्टियों ने 2019 के बाद से एक भी चुनाव नहीं लड़ा था और न ही इनके दफ्तरों का कोई भौतिक पता मिल सका। ऐसे में इन दलों ने रजिस्टर्ड अनरजिस्टर पॉलिटिकल पार्टी के रूप में बने रहने की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं किया। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले आयोग का इस कदम को राजनीतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।RUPP यानी Registered Unrecognised Political Parties, वे राजनीतिक दल हैं जो चुनाव आयोग के पास पंजीकृत तो हैं, लेकिन इन्हें राष्ट्रीय या राज्य स्तर की मान्यता नहीं मिली है। ये दल भारत में प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत होते हैं। पंजीकरण के बाद इन्हें टैक्स छूट जैसे कुछ विशेष लाभ मिलते हैं। देश में कुल 2,854 RUPP थे, जिनमें से चुनाव आयोग के एक्शन के बाद अब 2,520 बचे हैं।चुनाव आयोग ने इन 334 दलों को इसलिए हटाया क्योंकि इन्होंने 2019 के बाद से न तो लोकसभा, न राज्य विधानसभा और न ही उप-चुनाव में हिस्सा लिया। इन दलों के दफ्तरों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं पाया गया। आयोग ने जब जांच की, तो ये दल कागजों तक ही सीमित थे। कुछ RUPP पहले आयकर नियमों और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों का उल्लंघन करते पाए गए थे।


