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बिहार की सियासत में 2020 के विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत हासिल की थी। सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों से उसके पांच विधायक चुनाव जीतने में सफल रहे थे। इस जीत ने AIMIM को बिहार विधानसभा में एक महत्वपूर्ण ताकत बना दिया था और माना जा रहा था कि पार्टी राज्य की राजनीति में लंबी पारी खेलेगी। लेकिनचुनाव के लगभग डेढ़ साल बाद पूरा खेल पलट गया। 29 जून 2022 को IMIM को एक बड़ा झटका देते हुए, उसके पांच में से चार विधायकों ने पार्टी छोड़ दी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया। अख्तरुल ईमान अकेले विधायक जो पार्टी में रहे जिन्होंने AIMIM नहीं छोड़ी और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली AIMIM ने एक बड़ी पहल करते हुए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें पार्टी को महागठबंधन में शामिल करने का अनुरोध किया गया है। यह चिट्ठी AIMIM की बिहार ईकाई के अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने लालू प्रसाद को संबोधित करते लिखा-‘आप इस बात से अच्छी तरह अवगत है कि 2015 से बिहार की राजनिति में AIMIM पार्टी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है। पार्टी का पहले ही दिन से प्रयास रहा है कि चुनाव के समय सेक्यूलर वोटों का बिखराव ना हो। इस सच से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि सेक्यूलर वोटों के बिखराव के कारण ही साम्प्रदायिक शक्तियों को सत्तासीन होने का अवसर मिलता है। इसी उद्देश्य से हमने पिछले विधानसभा एवं लोक सभा चुनाव के समय महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की थी, किन्तु हमारा प्रयास सफल नहीं हो सका।

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