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दिल्ली :यह घोटाला तब सामने आया जब मयूर विहार फेज-1 के रहने वाले वीरेंद्र कुमार इंदौरा ने 29 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस उपायुक्त (पूर्व) अभिषेक धानिया ने एक बयान में कहा, ‘इंदौरा ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें एक व्यक्ति ने स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताकर फोन किया और उन पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया। जालसाजों ने कानूनी कार्रवाई करने की धमकी देते हुए उन्हें गिरफ्तारी से बचने के लिए 44.50 लाख रुपये हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया।दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए एक व्यक्ति से 44.50 लाख रुपये ठगने के आरोप में चार साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर अपराध होता है, जिसमें जालसाज स्वयं को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों पर कानून तोड़ने का झूठा आरोप लगाते हैं। उन्हें पैसे देने या व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करने के लिए मजबूर करते हैं।पुलिस उपायुक्त (DCP) ने बताया कि जांच के दौरान बैंक खातों की फोरेंसिक लेखा परीक्षा से पता चला कि जयपुर के रहने वाले दिनेश सिंघाड़िया के नाम पर एक निजी बैंक में 38 लाख रुपये हस्तांतरित किए गए थे। डीसीपी ने बताया कि बाद में बैंक से चेक के जरिए रकम निकाली गई। पुलिस के एक दल ने जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए 5 मार्च को जयपुर में छापेमारी कर दिनेश सिंघाड़िया को गिरफ्तार कर लिया।

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