रवि किशन ने शुभांकर मिश्रा को दिए इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, ‘बहुत गरीबी थी. लोग चलकर आते हैं, मैं रेंगकर आया हूं. मिट्टी के घर से निकला हूं और बहुत जिम्मेदारियां थीं. खेती गिरवी रखा था, सब कुछ उजड़ गया था. गरीबी इतनी थी कि आज भी जब मैं 7 स्टार होटल में जाता हूं तो अच्छा खाना ऑर्डर नहीं करता, खिचड़ी मंगाता हूं. लॉन्ड्री में कपड़े देने में भी संकोच होता है, सोचता हूं घर पर ही धुल जाएंगे.रवि किशन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में करीब 15 साल तक बेहद मुश्किल दौर देखा और घनघोर गरीबी से भी गुजरे.उन्होंने कहा, ‘गरीबी अभी भी मेरे जहन में बसी हुई है. मेरे बच्चे और पत्नी मेरे लिए गिफ्ट खरीदते हैं, लेकिन मैं खुद पर पैसे खर्च नहीं करता. मैं अपनी फैमिली पर पैसे खर्च कर देता हूं, लेकिन अपने ऊपर नहीं. मैंने घनघोर गरीबी देखी है. एक खिचड़ी बन रही है और उसमें 12 लोग खाना खा रहे हैं. पैदल मुंबई नाप दी, वड़ा पाव और चाय के लिए स्ट्रगल किया. फिल्म लाइन में 15 साल तक लोगों ने मेरे काम के पैसे तक नहीं दिए. ये सब मेरी जिंदगी के वो रंग हैं, जिन्होंने रवि किशन को बनाया.रवि किशन ने हिंदी, भोजपुरी, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में 750 से अधिक काम किया है.

