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दरअसल केजरीवाल और राघव चड्ढा में दूरियां उसी दिन से नजर आने लगी थी जब केजरीवाल जेल में थे और राघव अपनी पत्नी परिनीति के साथ लंदन में घूमते व मस्ती की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे थे। राघव को लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा गया। औपचारिक तौर पर वे श्री आनंदपुर साहब सीट पर नजर आए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे।

विपक्ष जहां इसे आप के अंदरूनी मतभेद का संकेत बता रहा है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है, जिसका मकसद अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना है।राघव चड्ढा ने सीधे तौर पर पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इशारों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो तरह की तस्वीर सामने आ रही है। एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे सामान्य बदलाव बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राघव चड्ढा के इशारे इसे आवाज दबाने की कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहे हैं।

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