मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में ट्रांसफर से जुड़ा फैसला लिया गया था। अधिकारियों ने साफ किया कि यह ट्रांसफर नीति केवल वर्ष 2026-27 के लिए है और 31 मई 2026 तक ही ट्रांसफर किए जाएंगे। नई नीति के अनुसार समूह ”क” और समूह ”ख” के अधिकारी जो अपने सेवाकाल में संबंधित जिलों में कुल तीन वर्ष पूरा कर चुके हों, उनको संबंधित जिलों से स्थानांतरित किया जाएगा।नई ट्रांसफर नीति के अनुसार समूह ”क” और समूह ‘ख” संवर्ग के जो अधिकारी अपने सेवाकाल में एक मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें राज्य के दूसरे मंडलों में स्थानांतरित किया जाएगा। विभागाध्यक्ष कार्यालयों और मंडलीय कार्यालयों में बितायी गई तैनाती अवधि को ट्रांसफर के लिए तीन और सात वर्ष की इस अवधि में नहीं गिना जाएगा। मंडलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम अवधि तीन वर्ष होगी। इसके लिए सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के ट्रांसफर प्राथमिकता के आधार पर किये जाने की व्यवस्था की गई है। नई नीति के तहत समूह ”क” और समूह ”ख” के ट्रांसफर संवर्ग वार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत एवं समूह ”ग” और ”घ”के कार्मिकों के ट्रांसफर कुल कार्यरत कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा तक किये जा सकेंगे।इस नीति के तहत यह भी व्यवस्था की गई है कि मंदित बच्चों और चलने-फिरने के लिहाज से पूर्णतः प्रभावित दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर किये जाने की व्यवस्था की गई है, जहां उनकी चिकित्सा देखभाल की उचित व्यवस्था हो। नीति के तहत यह व्यवस्था दी गई है कि स्थानांतरण सत्र के पश्चात अब समूह ”क” के साथ ही साथ समूह ”ख” के संबंध में विभागीय मंत्री के जरिये मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही तबादला किया जा सकेगा।उत्तर प्रदेश में सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 84 जिलों के एसडीएम का ट्रांसफर किया है। सरकार ने पहले ही इसके संकेत दिए थे कि पीसीएस अधिकारियों का ट्रांसफर किया जाएगा। खासकर उन अधिकारियों का ट्रांसफर होगा, जिन्होंने एक ही जगह में तीन साल पूरे कर लिए हैं। इसके बाद इन अधिकारियों के ट्रांसफर की लिस्ट जारी की गई है। आने वाले दिनों में अन्य अधिकारियों का भी ट्रांसफर किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी, जिसमें नई ट्रांसफर नीति को मंजूरी दी गई थी। इसके तहत यूपी में सिर्फ 31 मई तक ट्रांसफर किए जाएंगे।


