मुंबई(दानिश खान)भारतीय घरों में, औरत को अक्सर ‘गृहलक्ष्मी’ के रूप में पूजा जाता है – घर के अंदर देवी लक्ष्मी का जीता-जागता रूप, जिसकी मौजूदगी से घर में आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि आती है। अगर किसी घर से यह मौजूदगी हटा दी जाए, तो जो बचता है, वह है अस्त-व्यस्त ज़िंदगी। अपने नए प्रोमो *‘बरेली के बच्चन’* के साथ, COLORS ने ‘औरतों के बिना दुनिया’ के इस गहरे विषय को एक ऐसी ‘ड्रामा-कॉमेडी’ (dramedy) में पिरोया है, जो अपनी उथल-पुथल को गर्व से दिखाती है। *8 जून* को शुरू होने वाला और उसके बाद *सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सिर्फ़ COLORS पर* दिखाया जाने वाला यह नया शो, बच्चन परिवार के अजीबोगरीब घर के दरवाज़े खोलता है। यह दर्शकों को एक ऐसे घर से मिलवाता है, जो सिर्फ़ आदतों, सच्चाई से मुँह मोड़ने और उथल-पुथल के सहारे चल रहा है। यह एक ऐसा घर है, जिस पर गुस्सैल भाइयों और एक शराबी पिता का राज है। यह दिखाता है कि सालों तक सिर्फ़ मर्दों के सहारे चलने से एक परिवार के आपसी रिश्तों और भावनाओं पर क्या असर पड़ सकता है। अब, दूसरा प्रोमो बच्चन परिवार की बहू पर रोशनी डालता है।
क्या होता है जब कोई घर सालों तक बिना किसी औरत के चलता है, और फिर अचानक कोई औरत उस घर में आती है? बरेली की हलचल भरी गलियों में बुनी गई कहानी ‘बरेली के बच्चन’, इस सवाल का जवाब ‘संगम’ के ज़रिए देती है। संगम एक अमीर परिवार की महत्वाकांक्षी लड़की है, जिसका किरदार रमनीक कटारिया ने निभाया है। इत्तेफ़ाक से बच्चन परिवार में शादी करके आई संगम, एक ऐसी जगह में कदम रखती है, जहाँ के लोगों को लगता है कि औरतों के अनुशासन या भावनात्मक ज़िम्मेदारी के बिना भी उनका घर बिल्कुल ठीक चल रहा है। उसके पति ‘कृष्ण’ (जिसका किरदार प्रविष्ट मिश्रा ने निभाया है) के लिए, यह घर धरती पर स्वर्ग जैसा है। लेकिन संगम के लिए, यह परिवार के नाम पर छिपी हुई एक बड़ी उथल-पुथल है। क्या संगम इस घर की समस्याओं का सामना करके इसे फिर से ठीक कर पाएगी? या फिर बच्चन परिवार उसे घर से बाहर निकाल देगा, इससे पहले कि वह घर में कोई भी बदलाव ला पाए? *संगम का किरदार निभाते हुए, रमनीक कटारिया कहती हैं*, _“‘बरेली के बच्चन’ एक बहुत बड़ा सवाल पूछता है – जब किसी घर में सालों तक कोई औरत न हो, तो वह घर कैसा बन जाता है? संगम एक ऐसे घर में कदम रखती है जो सालों से बिना किसी औरत के चलता आ रहा है, लेकिन सिर्फ़ गुज़ारा करना और घर में मेल-जोल होना, ये दोनों एक ही बात नहीं हैं। अपने परिवार के तीखे रिश्तों और ऐसे ह्यूमर के साथ जो सीधे दिल को छू जाता है, यह प्रोमो संगम को बच्चन परिवार की बहू के तौर पर दिखाता है; साथ ही यह भी दिखाता है कि ‘बिना औरतों की दुनिया’ में किस तरह की उथल-पुथल मचती है, जिसके लिए वे कभी तैयार ही नहीं थे। कभी-कभी, बस एक औरत के घर में आने से ही यह पता चल जाता है कि घर में किस चीज़ की कमी थी।”_
*_~ किस्मत ने गूगली मारी, अब का करेगी संगम हमारी? ~_*
*देखिए ‘बरेली के बच्चन’, 8 जून से, सोमवार से शुक्रवार, रात 9 बजे, सिर्फ़ COLORS पर।*


