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“मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी — ईश्वर की कृपा ही मुझे आगे बढ़ाती रही” : डॉ. अनुज सक्सेना -
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“मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी — ईश्वर की कृपा ही मुझे आगे बढ़ाती रही” : डॉ. अनुज सक्सेना

मुंबई(दानिश खान) हाल ही में पपराज़ी एंटरटेनमेंट के पॉडकास्ट द वेदास स्पीक में नज़र आए अभिनेता और उद्यमी डॉ. अनुज सक्सेना ने लंबे समय बाद अपनी चुप्पी तोड़ी। लेकिन इस बार उन्होंने शोहरत या करियर की बात नहीं की, बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति पर खुलकर अपने विचार साझा किए। कभी टेलीविज़न की दुनिया के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक रहे अनुज अब और भी शांत और आत्मिक रूप से मजबूत होकर लौटे हैं।

अपनी दूरी के समय को याद करते हुए वे कहते हैं, “कई सालों तक कैमरे से दूर रहना मेरा खुद का फैसला था। ज़िंदगी में बहुत कठिन समय आया, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। मुझे लगता है, यह सिर्फ़ भगवान की कृपा थी जिसने मुझे संभाले रखा।”

अनुज के लिए अध्यात्म कोई नया चलन नहीं, बल्कि उनके जीवन की नींव है। वे कहते हैं, “मैं बचपन से ही आध्यात्मिक रहा हूँ। मेरे अनुसार, सभी भगवान एक ही हैं। हम इंसान उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं — जीसस, माता, शिव — पर शक्ति एक ही है। चाहे आप ‘जय माता दी’, ‘ॐ साईं राम’, ‘जय श्री राम’ या ‘इंशाल्लाह’ कहें, आप उसी ईश्वर को याद कर रहे होते हैं।”

आज की युवा पीढ़ी के बारे में अनुज कहते हैं, “आज के बच्चे सोशल मीडिया पर तो हैं — टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक — लेकिन अपनी जड़ों की शक्ति नहीं जानते। हमारी परंपराएँ हज़ारों साल पुरानी हैं और उनमें बहुत ज्ञान छिपा है। हाँ, यह कलियुग है, लेकिन अच्छे लोग अब भी हैं। हमें बस अपना कर्म करते रहना चाहिए और सही रास्ते पर चलना चाहिए।”

उनका जीवन मंत्र बहुत सरल है — श्रद्धा और सच्चे इरादे।
वे कहते हैं, “आपके इरादे साफ़ होने चाहिए। बिना फल की अपेक्षा के अपना कर्म करते रहो — यही बात मुझे हमेशा आगे बढ़ने की ताकत देती रही है।”

आज अनुज की शांत और संयमित सोच इस बात की याद दिलाती है कि सच्चे विश्वास और नम्रता के साथ जीना ही वह राह है जो इंसान को भीतर से मज़बूत बनाती है और उसकी दुनिया को फिर से रोशनी से भर देती है।

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