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मुंबई(दानिश खान)‘तुम से तुम तक’ में गायत्री देवी का किरदार निभा रहीं वंदना पाठक, जो प्रतीक शर्मा और पार्थ शाह के स्टूडियो LSD द्वारा निर्मित शो का हिस्सा हैं, मानती हैं कि हर कलाकार के जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब सही अवसर मिलने में समय लगता है।

वंदना कहती हैं, “सबसे ज़रूरी है धैर्य रखना और अपने काम के प्रति सच्चे रहना। हमारी इंडस्ट्री में प्रतियोगिता स्वाभाविक है — यहाँ बहुत प्रतिभा है, और यही इसकी खूबसूरती है। लेकिन जो बात आपको सबसे अलग बनाती है, वह है आपकी निरंतरता और आपके काम में ईमानदारी।”

वह आगे कहती हैं, “मेरे लिए ज़रूरी यह नहीं है कि मैं बहुत सारा काम करूँ, बल्कि ऐसा काम करूँ जो कहानी में सार्थक योगदान दे सके।”

वंदना मानती हैं कि अवसर मिलने में किस्मत का भी एक हिस्सा होता है, लेकिन यह सबकुछ नहीं है। “किस्मत आपके लिए दरवाज़ा खोल सकती है, लेकिन कमरे में टिके रहना आपके समर्पण और ईमानदारी पर निर्भर करता है। मैंने हमेशा महसूस किया है कि जब आप पूरे दिल से मेहनत करते हैं, तो किस्मत खुद आपके साथ जुड़ जाती है,” उन्होंने कहा।

वह आगे जोड़ती हैं, “मैं किस्मत पर भरोसा तो रखती हूँ, लेकिन मेरा विश्वास मेहनत, अनुशासन और सही समय पर है।”

वर्क-लाइफ़ बैलेंस के बारे में बात करते हुए वंदना कहती हैं, “हमारे पेशे में समय बहुत अनिश्चित होता है, इसलिए संतुलन बनाना वाकई मुश्किल है। लेकिन मैंने यह सीखा है कि संतुलन का मतलब हर चीज़ को बराबर समय देना नहीं, बल्कि सही प्राथमिकता तय करना और उस पल में पूरी तरह उपस्थित रहना है।”

वह मुस्कुराते हुए कहती हैं, “जब मैं सेट पर होती हूँ, तो अपना पूरा ध्यान काम पर देती हूँ, और जब घर पर होती हूँ, तो परिवार और अपनी शांति को प्राथमिकता देती हूँ। मेरा परिवार बहुत समझदार है, जिससे सब कुछ आसान हो जाता है।”

कई दशकों से इंडस्ट्री में काम कर चुकी वंदना आज भी खुद को सीखते रहने और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने के लिए प्रेरित महसूस करती हैं। “सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। ‘तुम्म से तुम्म तक’ में गायत्री का किरदार ऐसा ही है, जो मुझे भावनाओं और परिपक्वता के कई रंग दिखाने का मौका देता है,” उन्होंने कहा।

अंत में वंदना ने कहा, “आज मुझे जो सबसे ज़्यादा प्रेरित करता है, वह है दर्शकों का प्यार। देश-विदेश से जो स्नेह मुझे मिलता है, वही मेरी असली ताकत है। जब तक मैं लोगों का मनोरंजन कर सकती हूँ और उनके दिलों को छू सकती हूँ, मुझे लगता है कि मैं सही राह पर हूँ।”

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