मुंबई:ज़िद्दी दिल माने ना, सुहागन और गुम है किसी के प्यार में (GHKPM) जैसे शोज़ में शानदार अभिनय से पहचान बना चुके आदित्य देशमुख हमेशा अपने अभिनय की सीमाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। हाल ही में हुई एक बातचीत में उन्होंने अपने ड्रीम रोल्स, टाइपकास्टिंग की चुनौती और मनोरंजन जगत में बदलते ट्रेंड्स पर खुलकर बात की।
हर अभिनेता अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की ख्वाहिश रखता है। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा कौन सा रोल है जिसे वह अब तक नहीं निभा पाए लेकिन करना चाहते हैं, तो आदित्य ने कहा, “मेरा ड्रीम रोल एक रॉ एजेंट, गैंगस्टर, डॉन या किसी जियोपॉलिटिकल थ्रिलर में मास्टरमाइंड का किरदार निभाना है—कुछ वैसा ही जैसा हाल के दिनों में जॉन अब्राहम कर रहे हैं। इंडस्ट्री का ट्रेंड बदला है, और मुझे ऐसे गहरे और दमदार किरदार बहुत आकर्षित करते हैं। हाल ही में मैंने Superboys of Malegaon देखी, और मुझे ऐसे जॉनर में काम करने की बेहद इच्छा है।”
टाइपकास्टिंग इंडस्ट्री में एक आम समस्या है, जहां एक बार किसी अभिनेता की एक छवि बन जाती है तो उसे उसी तरह के किरदार ऑफर किए जाने लगते हैं। इस पर बात करते हुए आदित्य ने कहा, “मैं मानता हूं कि बार-बार एक जैसे किरदार निभाना उबाऊ हो सकता है। उदाहरण के लिए, ज़िद्दी दिल माने ना में मैंने एक आर्मी ऑफिसर का रोल निभाया था, जिसके बाद सुहागन में मुझे भाई का किरदार मिला, और अब GHKPM में भी मेरा किरदार कुछ हद तक वैसा ही है। हालांकि, मैंने इस बारे में मेकर्स से बात की, और उन्होंने मेरे किरदार को और गहराई और अलग पहचान देने के लिए काम किया।
बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों की घटती संख्या पर अपनी राय साझा करते हुए आदित्य ने कहा, “यह सच है कि कॉमेडी को अक्सर उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती, क्योंकि कई बार मुख्य अभिनेता से ज़्यादा स्पॉटलाइट कैरेक्टर एक्टर्स ले जाते हैं। GHKPM में मेरा किरदार भी हास्य से भरपूर है, कुछ-कुछ वैसे ही जैसे हम साथ साथ हैं में सैफ अली खान का था—हर स्थिति में ह्यूमर जोड़ने वाला। पहले बाज़ीगर जैसी फिल्मों में जॉनी लीवर को भरपूर स्क्रीन टाइम मिलता था, कभी-कभी तो शाहरुख खान से भी ज़्यादा। जॉनी सर एक लीजेंड हैं, और आज के दौर में वैसे कॉमेडियन को उतना स्पेस नहीं मिलता जितना पहले मिलता था।
जब रोमांस, थ्रिलर और मर्डर मिस्ट्रीज़ ऑडियंस के बीच सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं, तो आदित्य का झुकाव थ्रिलर की तरफ़ है।
“मुझे थ्रिलर फिल्में ज़्यादा पसंद हैं। हाल ही में मैंने डिप्लोमैट और मद्रास कैफे देखी, और मुझे लगता है कि आज के दौर में ऐसी दमदार कहानियां बहुत ज़रूरी हैं। स्कैम 1992 इसका बेहतरीन उदाहरण है। मैं ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना चाहूंगा जो दर्शकों को न सिर्फ़ एंटरटेन करें, बल्कि उन्हें कुछ सिखाएं भी।
आदित्य के लिए एक्टिंग सिर्फ़ एक करियर नहीं, बल्कि उनका जीवन भर का सपना है।”बचपन से ही मेरा सपना एक्टर बनने का था। मैं हमेशा फिल्मों का दीवाना रहा हूं, और मुझे यकीन था कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी ही होगी, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो। इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनना ही मेरे लिए सबसे बड़ा रोमांच है।”
एक अभिनेता को हमेशा खुद को निखारते रहना चाहिए, और आदित्य भी अपने हुनर को लगातार सुधारने में लगे हैं।
“जब मैंने इंडस्ट्री में कदम रखा, तब मैंने हर तरह की फिल्में देखनी शुरू कीं। अब मैं जर्मन सिनेमा देख रहा हूं और जर्मन भाषा भी सीख रहा हूं। अलग-अलग भाषाओं में दक्षता हासिल करने से अभिनय में भी निखार आता है। मेरे लिए सीखना कभी खत्म नहीं होता—हर दिन एक नया चैलेंज लाता है।”
लंबे वर्किंग ऑवर्स के चलते सेट पर कलाकारों के बीच मज़बूत बॉन्ड बन जाते हैं, लेकिन आदित्य के लिए प्रोफेशनलिज्म सबसे ऊपर है। “इंडस्ट्री में मेरे बहुत कम दोस्त हैं—मेरे असली दोस्त वे हैं, जो स्कूल के दिनों से मेरे साथ हैं। सेट पर ज़रूर हम बॉन्डिंग करते हैं, कभी बैडमिंटन खेलते हैं या मज़ेदार एक्टिविटीज़ में शामिल होते हैं ताकि पॉजिटिव माहौल बना रहे। लेकिन दिन के अंत में सबसे ज़रूरी चीज़ मेरा परफॉर्मेंस है। अच्छी केमिस्ट्री से सीन ज़रूर बेहतर बनते हैं, लेकिन मेरे लिए सबसे ज़रूरी चीज़ यह है कि मैं अपने किरदार को पूरी सच्चाई और ईमानदारी से निभाऊं।”