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मुंबई :लोकप्रिय जासूसी टीवी सीरीज़ सीआईडी के दूसरे सीज़न में ऋषिकेश पांडे फिर से इंस्पेक्टर सचिन की भूमिका में नज़र आ रहे हैं। अभिनेता ने लंबे समय बाद इस क्राइम ड्रामा में वापसी की है और इसे दोबारा निभाने का अनुभव उनके लिए खास रहा।

उन्होंने कहा, “जब आप किसी नए किरदार में कदम रखते हैं, तो यह हमेशा एक चुनौती होती है, खासकर जब वह पहले किसी और ने निभाया हो। लेकिन इंस्पेक्टर सचिन जैसे किरदार के साथ, जिसे मैं पहले भी निभा चुका हूँ, उसमें लौटना एक रोमांचक अनुभव था। और निश्चित रूप से, पूरी टीम का दोबारा एक साथ आना इसे और भी खास बना देता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम सभी इस शो की शुरुआत से ही एक परिवार की तरह हैं, और इतने सालों बाद भी हमारा वह बंधन बना हुआ है। जहाँ तक सचिन के किरदार की बात है, उसमें रोमांस का भी एक पहलू था। जैसे हर सीआईडी किरदार की अपनी अलग-अलग परतें थीं, वैसे ही सचिन के भी कुछ खास पल थे – रोमांटिक एंगल, दिल टूटने की कहानियाँ और उनके बीच का सफर। लेकिन मूल रूप से, वह हमेशा से एक स्टाइलिश और आत्मविश्वास से भरा पुलिस अधिकारी रहा है, और इस बार भी वही अंदाज़ देखने को मिलेगा।”

 

अभिनेता ने बताया कि उनके लिए यह यात्रा हमेशा यादगार रही है और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “हम दर्शकों से जुड़े रहेंगे और उन्हें हमेशा हमारा प्यार मिलेगा।”

ऋषिकेश पांडे ने यह भी साझा किया कि सीआईडी के सभी किरदार, एसीपी प्रद्युम्न से लेकर दया और अभिजीत तक, अपने असली रूप में वापस आए हैं और अपने किरदारों के प्रति पूरी तरह ईमानदार बने हुए हैं। “हमने इन किरदारों को इतने सालों तक निभाया है कि वे अब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हैं। लोग हमें असली पुलिस अधिकारी मानने लगते हैं, और वह जुड़ाव इतना गहरा है कि कई बार यह अनुभव अविश्वसनीय लगता है।”

उन्होंने अपने जीवन का एक दिलचस्प वाकया भी साझा किया। “ऐसा अनुभव मेरे खुद के घर पर हुआ था। मेरा चौकीदार अक्सर मुझसे कहता कि कोई मुझसे मिलने आया है। एक दिन मैंने गौर किया कि एक महिला बार-बार लौटकर आ रही थी। आखिरकार, वह मेरे पास आई और मुझसे मदद मांगी। उसने कहा कि उसका बेटा गलत राह पर जा रहा है और उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई थी, लेकिन उसे यकीन था कि मैं, यानि ‘इंस्पेक्टर सचिन’, उसकी मदद कर सकता हूँ।”

अभिनेता ने आगे कहा कि जो बात उन्हें सबसे ज़्यादा प्रभावित कर गई, वह यह थी कि यह कोई आम लोग नहीं थे, बल्कि शिक्षित और स्थापित लोग थे, फिर भी वे उनके किरदार पर इतना गहरा विश्वास रखते थे।ऐसा जुड़ाव, ऐसा विश्वास… यह एक बेहद भावनात्मक और अविस्मरणीय एहसास है। जहाँ भी जाते हैं, लोग हमें अपना मानते हैं, और यही सबसे खूबसूरत चीज़ है”।

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