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Thu. Aug 6th, 2026
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अजमेर :राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की लोकप्रिय दरगाह के शिव मंदिर होने का दावा किया जा रहा है. हिन्दू सेना द्वारा निचली अदालत में इसके लिए जांच की मांग करते हुए याचिका दाखिल की गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. इसी के साथ कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर सुनवाई की तारीख 20 दिसंबर तय की है. इस पर अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती का बड़ा बयान आया है. उन्होंने निचली अदालत के याचिका स्वीकार करने के फैसले का विरोध किया और नाराजगी भी जताई है. इसी के साथ सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सरवर चिश्ती ने कहा, “ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह सांप्रदायिक सद्भाव, विविधता और बहुलवाद का प्रतीक है. यह दरगाह अनेकता में एकता को बढ़ावा देती है. साथ ही, अफगानिस्तान से लेकर इंडोनेशिया तक इस्लाम का सबसे बड़ा मरकज है. इस दरगाह के करोड़ों-अरबों अनुयायी हैं. यह कोई रोज-रोज का तमाशा खड़ा करने वाली बात नहीं है.”

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