लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है.
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा लोकतंत्र को कमजोर करने में लगी है और उसके मातृ संगठन आरएसएस का एजेंडा लोकतंत्र की आड़ में तानाशाही थोपना है। इन दोनों की कोशिश है कि विधानसभा के उपचुनाव में साजिश करके जैसे तैसे लोकतंत्र की पवित्रता भंग की जाए। समाजवादी पार्टी भाजपा की इन साजिशों से सतर्क है और उनके किसी भी कुत्सित इरादे को सफल नहीं होने देगी। जनता भी भाजपा को करारी शिकस्त देने के लिए मन बना चुकी है।
अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय, लखनऊ के डॉ0 लोहिया सभागार में एकत्र पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा में सत्ता संघर्ष छिड़ा हुआ है। इस कारण राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो रही है। थाना- तहसील और दूसरे विभागों में जनता भटक रही है, बिना रिश्वत कोई काम नहीं हो रहा है। जनता त्रस्त है। भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने नफरत फैलाने के अपने एजेंडा के तहत उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड में होटल, ढाबा और ठेला लगाकर जीवनयापन करने वालों को अपना नाम लिखने का सरकारी आदेश देकर साबित कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर सौहार्द और भाईचारा नहीं रहने देना चाहती है।
अखिलेश यादव ने कहा कि विगत लगभग आठ वर्ष में भाजपा ने सरकार में रहते हुए विकास का कोई काम नहीं किया है। विकास भाजपा सरकार में पूरी तरह ठप्प है। भाजपा की सरकार में नौजवानों को धोखा मिला है। उनकी रोटी-रोजगार के प्रति सरकार जरा भी फिक्रमंद नहीं है। उनका भविष्य अंधकार में है। नौकरियों में छंटनी हो रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में किसान सर्वाधिक उत्पीड़ित है। किसानों की आय दोगुनी करने का झांसा दिया गया था, उसे भी पूरा नहीं किया। उसकी फसलों का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है। भाजपा किसानों को एमएसपी का कानूनी अधिकार नहीं देना चाहती है। भाजपा सरकार में बाजार पर पूंजी घरानों का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है। महंगाई चरम पर है। जनसामान्य के उपयोग की सभी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। भाजपा सरकार महंगाई और भ्रष्टाचार रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
