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Wed. Mar 18th, 2026
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मुंबई(दानिश खान)भारत का लगभग 61% हिस्सा मध्यम से उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है। इससे बड़ी आबादी खतरे में है। 1993 के लातूर और 2001 के भुज जैसे बड़े भूकंपों के कारण लगभग 30,000 लोगों की जान गई, 1,90,000 से अधिक लोग घायल हुए और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा—जो प्रैक्टिस-ड्रिवन सिस्मिक विशेषज्ञता की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे देश के लिए भविष्य के सिविल इंजीनियरों को ऐसी संरचनाओं को डिजाइन करने, उन्हें मजबूत बनाने (रेट्रोफिटिंग) और उनका प्रबंधन करने पर ध्यान देना चाहिए, जो भूकंप का सामना कर सकें और जरूरी सेवाओं को चालू रख सकें।

240 से अधिक वर्षों की इंजीनियरिंग विरासत के साथ, बुडापेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इकोनॉमिक्स (बीएमई) भारतीय छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक भूकंप इंजीनियरिंग कौशल से लैस करती है, जिसका उपयोग वे अपने देश में लौटकर कर सकते हैं।

बीएमई के सिविल इंजीनियरिंग फैकल्टी में एसोसिएट प्रोफेसर और हंगरी की ह्यूनर शहरी खोज एवं बचाव टीम के संरचना विशेषज्ञ डॉ. अत्तिला लास्लो जू के लिए भारत की स्थिति तकनीकी रूप से काफी परिचित है। वे कहते हैं,

“चाहे हम मध्य यूरोप में काम करें, तुर्की में या सुदूर हिमालय को देखें, बड़ा सवाल वही है: हम इमारतों और बुनियादी ढांचे को व्यावहारिक तरीके से अधिक सुरक्षित कैसे बनाएं?”

जू और बीएमई में उनकी टीम पूरे भूकंप आपदा प्रबंधन चक्र पर काम करती है। इसमें वे संरचनात्मक विफलताओं को बेहतर समझने और इमारतों की मजबूती बढ़ाने के लिए बचाव टीमों के साथ सिमुलेशन, लैब परीक्षण और भूकंप के बाद किए जाने वाले जमीनी आकलन को जोड़ते हैं।

जू बताते हैं,

“कोड-स्तर के काम और जमीनी अनुभव का यह मेल ही हम अपनी शिक्षा में लाते हैं। छात्र भूकंपीय विश्लेषण और संरचनात्मक गतिशीलता के उन्नत तरीके सीखते हैं…”असल भूकंपों से जुड़े केस स्टडी, तस्वीरें और माप भी देखे जाते हैं। इससे सिद्धांत अधिक वास्तविक लगता है और बाद में जब उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स में डिजाइन से जुड़े फैसले लेने होते हैं, तो यह उनकी मदद करता है।

बुडापेस्ट में पढ़ाई करने का विकल्प चुनने वाले भारतीय छात्रों के लिए इसका मतलब है कि बीएमई में सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा सीधे तौर पर उन भूकंपीय चुनौतियों से जुड़ी है, जिन्हें वे अपने देश में जानते हैं। यह विश्वविद्यालय अंग्रेज़ी भाषा में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है, जिसमें भूकंपीय डिजाइन, पुल और संरचनात्मक इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचा नियोजन और वॉटर इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता शामिल है। ये पाठ्यक्रम चल रहे अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं और मानकीकरण गतिविधियों से गहराई से जुड़े हुए हैं।

बीएमई, ईईएलआईएसए यूरोपियन यूनिवर्सिटी अलायंस का भी सदस्य है, जो पूरे यूरोप के प्रमुख इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों को एक साथ लाता है। इस नेटवर्क के जरिए छात्र और स्टाफ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डिजिटल ट्विन्स, पुलों और सुरंगों की स्मार्ट मॉनिटरिंग, और मौजूदा इमारतों का आकलन करने तथा उन्हें मजबूत बनाने के नए तरीकों जैसे विषयों पर मिलकर काम करते हैं।

ये प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़ते भारतीय शहरों के लिए सीधे तौर पर प्रासंगिक हैं, जहाँ पुराने भवन और नया परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर उन क्षेत्रों में एक साथ मौजूद होते हैं, जहाँ भूकंप का काफी खतरा होता है।

जू आगे कहते हैं,

“भूकंप को लेकर भौतिकी हर जगह एक जैसी होती है, और भूकंपीय भार के तहत संरचनाओं का व्यवहार भी उन्हीं सिद्धांतों का पालन करता है। अगर भारत के युवा इंजीनियर हंगरी में इन सिद्धांतों की गहरी समझ हासिल कर लेते हैं, तो वे इस ज्ञान को वापस ले जाकर भारतीय नियमों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकते हैं, और उस पीढ़ी का हिस्सा बन सकते हैं जो अपने देश में अधिक सुरक्षित मोहल्लों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करती है।

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