मुंबई(दानिश खान)कलर्स के ‘मन्नत हर खुशी पाने की’ में ड्रामा और ख़तरा एक साथ जुड़े हुए हैं, जो अब हर रोज़ शाम 7:30 बजे प्रसारित होता है, जहाँ हर जश्न में एक तूफ़ान और हर मुस्कान में एक राज़ छिपा है। इस हफ़्ते, सलूजा परिवार का जन्माष्टमी उत्सव बिल्कुल भी शांत नहीं है—क्योंकि जगमगाती रोशनियों और खुशियों भरे जयकारों के पीछे, सच्चाई फूट रही है, वफ़ादारी टूट रही है, और ज़िंदगी खतरे में है। एक दिल दहला देने वाले मोड़ में, मन्नत (आयशा सिंह) अपने जन्म के बारे में दर्दनाक सच्चाई का पता चलने के बाद अपने पिता अनिरुद्ध को घर से निकाल देती है। यह खुलासा सलूजा परिवार को वज्रपात की तरह झकझोर देता है: विश्वास टूट चुका है, रिश्ते तार-तार हो चुके हैं… मन्नत की माँ ऐश्वर्या (मोना वासु) अपनी बेटी के पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के दबाव का विरोध करती है, क्योंकि वह अपने जीवन के सबसे गहरे ज़ख्म को कुरेदने को तैयार नहीं है।
लेकिन जैसे-जैसे घर के अंदर भावनात्मक तूफ़ान उठ रहे हैं, बाहर जन्माष्टमी के जश्न की धूम मची हुई है। ढोल, थाप और पुष्प वर्षा के बीच, विक्रांत (अदनान खान) मन्नत की हथेली में एक पेंडेंट रख देता है—एक वादा, एक बंधन, हमेशा उसके साथ खड़े रहने की एक मौन प्रतिज्ञा। फिर भी, परछाईं में, खतरा मंडरा रहा है। ऐश्वर्या की बेटी मल्लिका, विक्रांत के तलाक को नाकाम करने और मन्नत के साथ उसके मिलन को रोकने की ठान लेती है। दही हांडी समारोह के दौरान जैसे ही भीड़ जयकार करती है, मल्लिका का जाल खुल जाता है, जिससे विक्रांत और मन्नत की जान जोखिम में पड़ जाती है। लेकिन जब विपत्ति अपरिहार्य लगती है, अनिरुद्ध खुद को खतरे में डालकर, अपनी जान की बाजी लगाकर उन्हें बचाता है। क्या यह त्याग मन्नत के घायल दिल पर मरहम लगाएगा या विश्वासघात के ज़ख्म इतने गहरे हो जाएँगे कि उन्हें माफ नहीं किया जा सकेगा?
देखिए ‘मन्नत हर खुशी पाने की’ हर रोज़ शाम 7:30 बजे, सिर्फ़ कलर्स पर।


