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मुंबई:पीपुल्स फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया के पहले मानद निदेशक नियुक्त किए गए ‘तेहरान’ एक्टर जॉन अब्राहम ने कहा कि कुत्ते आवारा नहीं हैं, बल्कि समुदाय का हिस्सा हैं और बहुत से लोग उन्हें प्यार करते हैं। उन्होंने आगे लिखा, ‘मुझे उम्मीद है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि ये आवारा नहीं, बल्कि सामुदायिक कुत्ते हैं, जिनका कई लोग सम्मान करते हैं, उन्हें बेजुबानों को खिलाते-पिलाते और उन्हें प्यार करते हैं। खासकर दिल्ली के लोग जो उन्हें आवारा कुत्ते नहीं बल्कि सोसाइटी का हिस्सा समझाते हैं।’ एक्टर ने ये भी कहा कि यह निर्देश पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 और इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के पिछले फैसलों के बिल्कुल उलटा है। जॉन का कहना है, ‘एबीसी नियम के अनुसार कुत्तों को किसी शेल्टर होम में नहीं रखते हैं। इसके बजाय उनकी नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें उन्हीं इलाकों में वापस छोड़ देते हैं जहां वे रहते हैं। जहां एबीसी के नियम को ईमानदारी से लागू किया जाता है।’ साथ ही यह भी बताया कि जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में भी यही नियम अपनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को इन आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था, जहां उनका टीकाकरण होगा। अब कोर्ट के इस सख्त आदेश का कई लोग विरोध भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। इस बारे में अब एक्टर जॉन अब्राहम ने मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई को एक पत्र लिखकर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश की समीक्षा और संशोधन का आग्रह किया। यह पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकारियों को सभी आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द सड़कों से उठाकर शेल्टर होम में शिफ्ट करने के निर्देश के एक दिन बाद आया है।

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