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शेखर सुमन ने अपने दिल को छू लेने वाले हिंदी नाटक "एक मुलाक़ात" में महान कवि साहिर लुधियानवी को जीवंत किया है -
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शेखर सुमन ने अपने दिल को छू लेने वाले हिंदी नाटक “एक मुलाक़ात” में महान कवि साहिर लुधियानवी को जीवंत किया है

मुंबई:गीतिका त्यागी ने अमृता प्रीतम की भूमिका निभाई है | प्रस्तुतकर्ता: अराद फॉरएवर | निर्माता: सादिया मुस्तहसीन हसन | लेखक: सुम्मा अहमद और सैफ हैदर हसन | निर्देशक: सैफ हैदर हसन

इस नाटक में मोहम्मद सकील, अनीस बज्मी, अध्ययन सुमन, नंदिता पुरी, रेखा खान, राजीव निगम, शेरोन प्रभाकर और कई अन्य कलाकार शामिल हुए।

एक कालातीत प्रेम कहानी। दो प्रतिष्ठित साहित्यिक दिग्गज। एक अविस्मरणीय शाम। “एक मुलाक़ात” का समापन एक बार फिर हो रहा है, यह एक बेहद मार्मिक हिंदी नाटक है जो भारत के दो सबसे प्रसिद्ध कवियों – साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम के बीच की खामोशियों, कविताओं और अनसुलझे भावनाओं की पड़ताल करता है। अनुभवी अभिनेता शेखर सुमन द्वारा उदास और आकर्षक साहिर की भूमिका और प्रतिभाशाली गीतिका त्यागी द्वारा उग्र, भावुक अमृता की भूमिका में अभिनीत यह नाटक दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाने का वादा करता है जहाँ कविता, प्रेम और लालसा का मिलन होता है।

“एक मुलाक़ात” सिर्फ़ एक मुलाक़ात नहीं है, यह दो कवियों के बीच एक कल्पित, मार्मिक मिलन है जिनके दिल कविताओं में धड़कते हैं, जिनकी आत्माएँ प्रशंसा में गुंथी हुई हैं, और जिनकी नियति कभी समाप्त नहीं हुई। एक ऐसी शांत शाम में, जो कभी थी ही नहीं, यह नाटक स्वीकारोक्ति, अनभेषित पत्रों, दिल टूटने और अधूरे प्रेम के उत्सव का एक कैनवास बन जाता है।

अपनी बहुमुखी प्रतिभा और मंचीय उपस्थिति पर पकड़ के लिए जाने जाने वाले शेखर सुमन, साहिर की द्वंद्वात्मक प्रतिभा को तीव्रता और शालीनता के साथ जीवंत करते हैं। गीतिका त्यागी की अमृता साहसी होते हुए भी संवेदनशील है, जो एक ऐसी महिला की भावना को दर्शाती है जिसने बिना किसी खेद के जिया और प्यार किया।

“साहिर लुधियानवी का किरदार निभाना एक ज़िम्मेदारी है। वे सिर्फ़ एक शायर नहीं थे; वे विद्रोह, रोमांस और चिंतन की आवाज़ थे। ‘एक मुलाक़ात’ उनकी प्रतिभा, उनकी खामोशियों और अमृता प्रीतम के प्रति उनके अनकहे प्रेम को मेरी श्रद्धांजलि है। मंच पर मेरी हर पंक्ति उनकी तीव्रता से गूंजती है, और हर ठहराव हज़ारों अनकहे एहसासों को समेटे हुए है। यह अभिनय नहीं, बल्कि एहसास है,” शेखर सुमन कहते हैं।

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