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मुंबई(शिब्ली रामपुरी) आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर इमरजेंसी का जिक्र हो रहा है और जगह-जगह इस पर कार्यक्रम भी आयोजित किए गए इसे एक काला अध्याय बताया गया.
फिल्मी दृष्टि से देखें तो आपातकाल पर एक नहीं बल्कि कई फिल्में बनी हैं जिनमें कुछ फिल्में पसंद भी की गई. इसी साल जनवरी माह में मशहूर फिल्म अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा निर्देशित और अभिनय से सजी फिल्म इमरजेंसी रिलीज हुई थी.
इमरजेंसी की रिलीज से पहले मीडिया के लिए रखी गई विशेष स्क्रीनिंग के दौरान एक पत्रकार ने मुझसे सवाल किया था कि आपको यह फिल्म कैसी लगी तो जब मैंने यह कहा कि यह फिल्म एक बेहतरीन फिल्म है और कंगना रनौत ने इसमें न सिर्फ अच्छा डायरेक्शन किया है बल्कि उनकी एक्टिंग भी काफी दमदार रही है तब उस पत्रकार का जवाब यह था कि आप हमेशा किसी भी फिल्म की समीक्षा बहुत ही अच्छे तरीके से करते हैं लेकिन आप इस फिल्म की बहुत तारीफ कर रहे हैं तब मेरा जवाब यही था कि यह फिल्म कुछ कमियों के बाद भी एक अच्छी फिल्म है क्योंकि कंगना रनौत ने इस फिल्म में काफी ईमानदारी से हमारे देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के जीवन के बारे में दिखाने का प्रयास किया है.
यदि गंभीरता से इस फिल्म को देखा जाए तो यह फिल्म हकीकत में इंदिरा गांधी की छवि खराब नहीं करती हां इतना जरूर है कि कुछ और मजबूत उनके द्वारा लिए गए निर्णयों को इस फिल्म में शामिल नहीं किया गया लेकिन यह फिल्म इंदिरा गांधी के मजबूत व्यक्तित्व को भी सामने लाती है कि किन हालात में इंदिरा गांधी ने कई कठोर फैसले लिए थे.
इमरजेंसी फिल्म की खासियत यह थी कि इसमें इंदिरा गांधी जी के जीवन को उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को ज्यादा तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं किया गया था जैसा कि शोर मचाया जा रहा था कि भाजपा की संसद कंगना रनौत जब फिल्म बना रही हैं और डायरेक्शन भी उनका है तो फिल्म में वह इंदिरा गांधी के बारे में अच्छा नहीं दिखाएंगी जबकि ऐसा पूरी तरह से सच नहीं था.

यह बात अलग है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई भी कमाल नहीं कर सकी और फिल्म फ्लॉप हो गई लेकिन कंगना रनौत की एक्टिंग और उनके डायरेक्शन की इस फिल्म में तारीफ करनी पड़ेगी. फिल्म भले ही नाकामयाब रही हो लेकिन कंगना रनौत के निर्देशन और उनकी एक्टिंग की इस फिल्म में काफी सराहना हुई थी. फिल्म में कमी निकालने वालों ने तो बहुत कमी निकाली लेकिन मैं समझता हूं कि फिल्म में काफी ईमानदारी से डायरेक्शन और एक्टिंग का ध्यान रखा गया था और कहानी पर भी काफी मज़बूती से फोकस किया गया था.

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