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आतंकी हमले के दौरान कई पर्यटकों की जान बचाने वाली 15 वर्षीय रुबीना के हौसले की हो रही है तारीफ़ -
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Wed. Aug 19th, 2026

आतंकी हमले के दौरान कई पर्यटकों की जान बचाने वाली 15 वर्षीय रुबीना के हौसले की हो रही है तारीफ़

मैदान से बाहर भाग रहे कई पर्यटकों को घर में शरण दी और बाद में उन्हें पहलगाम तक भी पहुंचाया। कुछ पर्यटक तो रास्ता भटक गए थे। उनमें से किसी के पांव में जूते नहीं था,तो किसी के कपड़े वहां झाड़ियों में फट गए थे।

 

रुबीना अपनी जान जोखिम में डाल इधर-ऊधर दौड़ रहे पर्यटकों को सुरक्षित जगह पहुंचने में जुट गई। उसने कई पर्यटकों को अपने घर में शरण तक दी और कई रास्ता भटके लोगों को पहलगाम तक पहुंचाया।

 

रुबीना ने कहा कि 22 अप्रैल को हमले के कुछ देर पहले दोपहर दो बजे वह चेन्नई के टूरिस्ट दंपती के साथ थी। सब कुछ ठीक था। मैदान में बहुत से पर्यटक थे। दंपती ने मुझे मैगी खाने को दी। वह मैगी अभी खाने ही लगी थी कि गोलियों की आवाजें आई। पहले लगा पटाखे की आवाज है, लेकिन जब देखा तो मैदान में चीख व पुकार मची थी। घोड़े वालों ने मुझे सचेत कर बताया कि रुबीना भागो आतंकी हमला हो गया है।

 

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक रुबीना के पिता गुलाम अहमद ने कहा कि गोलियों की आवाज पूरी घाटी में गूंज रही थी। हम रुबीना और दूसरी बेटी मुमताज के लिए परेशान थे। दोनों बाहर निकली थीं। करीब आधे घंटे बाद रुबीना पर्यटकों को भी अपने साथ घर पहुंची तो हमने राहत ली। डरे सहमे पर्यटकों को हौसला दिया और काफी देर तक घर में रुकवाया।

गुलाम अहमद गुर्दे की बीमारी से ग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर हैं। इस घटना के बाद पहलगाम में काम करने वाले हजारों की तरह रुबीना का रोजगार भी प्रभावित हुआ है। रुबीना गाइड की भूमिका निभाती है।

वह पर्यटकों को बैसरन, आडू तथा बेताब वैली जैसे स्थानों पर ले जाकर सैर करा रोजगार कमाती है। बता दें कि रुबीना को पर्यटक खरगोश के साथ फोटो खिंचवाने के बदले में 50-100 रुपये देते हैं।

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