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Thu. Aug 6th, 2026
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 जावेद अख्तर ने कहा कि पुराने साहित्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी गहराई और जीवन से जुड़ाव है, जिसे आज के पाठकों तक आसान शैली में पहुंचाना जरूरी है. मौजूदा सिनेमा और गीतों के स्तर पर अपनी राय रखते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि आज की परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं हैं, इसलिए उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली है.बिहार की राजधानी पटना में आयोजित ‘किताब उत्सव’ में शामिल होने पहुंचे मशहूर कवि, शायर, गीतकार और हिंदी फिल्मों के पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने अपनी किताब ‘सीपियां’ के बहाने साहित्य, जीवन और सिनेमा पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि इस किताब में कबीर, तुलसी, रहीम और वृंद जैसे महान कवियों के चुनिंदा दोहों को सरल भाषा में समझाने की कोशिश की गई है, ताकि नई पीढ़ी भी उनके अर्थ को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझ सके.हालांकि उन्होंने यह भी माना कि आज भी अच्छे लेखक और गीतकार मौजूद हैं, लेकिन वैसा रचनात्मक माहौल नहीं है, जहां शब्दों को ठहराव और भावनाओं को विस्तार मिल सके. उनके मुताबिक आज गीतों की रफ्तार जरूर बढ़ी है, मगर उनमें संवेदना और अर्थ की परतें पहले की तुलना में कम होती जा रही हैं

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