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कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती -
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Mon. Sep 21st, 2026

कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती

बॉम्बे हाई कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट की ओर से पति को दिया गया तलाक का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती, खासकर तब जब पत्नी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया हो।

इससे पहले, नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति की गवाही और पति-पत्नी के बीच हुई व्हाट्सऐप व एसएमएस बातचीत को सबूत माना था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे में शिफ्ट होने का दबाव डालती थी, उसके परिवार का अपमान करती थी और इन संदेशों से उसे मानसिक क्रूरता का सामना करना पड़ा।फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यदि कोई पत्नी अपने पति पर माता-पिता को छोड़कर दूसरे शहर में रहने का दबाव बनाती है और ससुराल वालों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती है, तो यह मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस फैसले से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि पत्नी को इन आरोपों और संदेशों पर सफाई देने या उन्हें चुनौती देने का मौका ही नहीं दिया गया। हाई कोर्ट ने साफ किया कि केवल व्हाट्सऐप चैट के आधार पर तलाक का फैसला नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने कहा, “सिर्फ व्हाट्सऐप चैट पर भरोसा करके तलाक की डिक्री नहीं दी जा सकती। पत्नी को अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए.

हाईकोर्ट ने मामले को दोबारा नासिक फैमिली कोर्ट के पास भेज दिया है। अब फैमिली कोर्ट में पत्नी को अपनी बात रखने और सबूत पेश करने का मौका दिया जाएगा, जिसके बाद मामले पर नया फैसला लिया जाएगा।

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