सूत्रों के अनुसार, उनकी तबीयत खराब होने के चलते डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और साथ ही नियमित जांच भी की जा रही है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, शरद पवार बारामती सीट पर हो रहे उपचुनाव में 23 अप्रैल को वोटिंग नहीं कर पाएंगे। ऐसे में शरद पवार ने सोशल मीडिया पर बारामती की जनता के लिए भावुक पोस्ट लिखा है।एनसीपी (शरद चंद्र पवार) पार्टी के प्रमुख शरद पवार हॉस्पिटल में एडमिट है। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि उन्हें दोपहर बाद अस्पताल में एडमिट किया गया, जहां उनका इलाज जारी है।शरद पवार ने कहा- “मैंने 1967 में लड़ी गई अपनी पहली चुनाव से लेकर अब तक बारामती विधानसभा क्षेत्र में अपने मताधिकार का लगातार उपयोग किया है। अब वर्ष 2026 में बारामती विधानसभा क्षेत्र में महाराष्ट्र के एक लोकप्रिय और प्रिय नेता स्वर्गीय अजित पवार के दुर्भाग्यपूर्ण, आकस्मिक निधन की शोकपूर्ण पृष्ठभूमि में यह उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव के लिए बारामती आकर अब तक की परंपरा के अनुसार मतदान करने का मैंने निर्णय लिया था। दुर्भाग्यवश मेरी तबीयत खराब हो गई और मुझे मुंबई के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। डॉक्टरों ने उपचार और अनिवार्य विश्राम के कारण मुझे मुंबई से बाहर जाने से मना किया है। इसलिए अत्यंत मजबूरी में मुझे अपने मताधिकार का उपयोग करने से वंचित रहना पड़ रहा है, यह मैं अत्यंत दुःखी और खेदपूर्ण मन से कहना चाहता हूँ। मुझ पर अपार प्रेम और विश्वास रखने वाले बारामती के नागरिक, मतदाता और कार्यकर्ता मुझे समझेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है।
शरद पवार ने आगे कहा- “हमारे दल (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी–शरद चंद्र पवार) ने इस उपचुनाव में सुनेत्रा अजित पवार को समर्थन दिया है। स्वर्गीय अजित पवार को यह हमारे दल की ओर से एक प्रकार की श्रद्धांजलि है। मैं बारामती के सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे सुनेत्रा अजित पवार को वोट देकर स्वर्गीय अजित पवार को श्रद्धांजलि अर्पित करें। बारामती के मतदाताओं ने मुझ पर लंबे समय से विश्वास बनाए रखा है। मुझे विश्वास है कि वे इस अपील का सकारात्मक जवाब देंगे।”
शरद पवार ने आगे कहा- “मतदान के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो पाने के कारण मैंने चुनाव आयोग के विभिन्न विकल्पों की भी जानकारी ली और पूछताछ की। लेकिन राज्य के चुनाव अधिकारियों द्वारा बताया गया कि ऐसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। अंततः अत्यंत दुःखी और भारी मन से मुझे मतदान से दूर रहने का निर्णय लेना पड़ा।


