लोकसभा में बिल पेश किए जाने से पहले हुई संक्षिप्त चर्चा के दौरान हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपना विरोध जताने के लिए साहिर लुधियानवी का एक शेर पढ़कर भी सुनाया।एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण ( नारी शक्ति वंदन अधिनियम ) लागू करने के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयकों का विरोध किया है। ओवैसी ने कहा है कि इस विधेयक से देश का संघीय ढांचा कमजोर होगा।असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘ये विधेयक देश के संघीय ढांचे को बर्बाद कर देंगे। मैं सख्ती से इन विधेयकों को प्रस्तावित किए जाने का विरोध कर सकता हूं।एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में महिला आरक्षण बिल का खुलकर विरोध किया और कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए. ओवैसी ने कहा कि यह बिल सिर्फ महिलाओं के आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश के संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र पर भी असर पड़ सकता है. ओवैसी के मुताबिक, सीटों के पुनर्गठन (डिलिमिटेशन) के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों की ताकत कम हो सकती है, जबकि ज्यादा आबादी वाले राज्यों को फायदा मिलेगा। उनका कहना है कि इससे छोटे राज्यों की आवाज कमजोर हो जाएगी जो सीधे तौर पर संघीय व्यवस्था के खिलाफ है. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में ओबीसी और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुंच सकता है. उनका सवाल साफ था क्या यह बिल सच में सबको साथ लेकर चल रहा है, या कुछ वर्गों को पीछे छोड़ रहा है? ओवैसी ने संसद की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि बिल को पेश करने से पहले जरूरी नियमों और नोटिस अवधि का ठीक से पालन नहीं किया गया. उनके मुताबिक, यह संसदीय नियमों का उल्लंघन है. बहस के दौरान ओवैसी ने शायर साहिर लुधियानवी का हवाला देते हुए सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि आज भी गरीब, मुस्लिम और ओबीसी वर्ग के लोगों की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। शायरी के जरिए उन्होंने इशारा किया ‘शहंशाहों का गरीबों से कोई ताल्लुक नहीं… दौलत के दम पर हमारी मोहब्बत का मजाक उड़ाया जाता है…


