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कोर्ट ने माना है कि उद्योगपति मार्क जकरबर्ग की कंपनी मेटा ने बच्चों की सुरक्षा और उनकी मानसिक सेहत से जुड़े खतरों को छिपाया और मुनाफे के चक्कर में नियमों का उल्लंघन किया. लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने कंपनी को दोषी पाया और जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया.

यह मामला लगभग सात हफ्तों तक चला. न्यू मेक्सिको के सरकारी वकीलों ने अदालत में दलील दी कि मेटा को अच्छी तरह पता था कि उसके प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं, लेकिन कंपनी ने कभी भी सार्वजनिक रूप से इन खतरों के बारे में जानकारी नहीं दी. अभियोजन पक्ष का कहना था कि मेटा ने सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी. जूरी ने माना कि मेटा ने यह जानकारी छिपाई कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों के साथ यौन शोषण से जुड़े खतरे मौजूद हैं और इनका असर उनकी मानसिक सेहत पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा, कंपनी पर यह भी आरोप साबित हुआ कि उसने भ्रामक और गलत जानकारी दी.

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