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राज्यसभा में राघव चड्ढा ने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन और ‘कट मनी’ व्यवस्था का मुद्दा उठाया -
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Mon. Sep 21st, 2026

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन और ‘कट मनी’ व्यवस्था का मुद्दा उठाया

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए लिखा कि संसद में उन्होंने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच चल रहे ‘कट मनी’ सिस्टम पर बात की।भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच ‘रेफरल कमीशन’ और ‘कट मनी’ की व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ डॉक्टर और डायग्नोस्टिक सेंटर मरीजों के इलाज के बजाय रेफरल के आधार पर काम कर रहे हैं, जिसका सीधा असर मरीजों के मेडिकल खर्च पर पड़ता है।राघव चड्ढा के मुताबिक, डायग्नोस्टिक सेंटर ‘कट मनी’ को ‘मार्केटिंग एक्सपेंस’ कहते हैं, जबकि डॉक्टर इसे ‘रेफरल कमीशन’ बताते हैं। उन्होंने दावा किया कि आखिरकार यह पूरा खर्च मरीज के अस्पताल के बिल में जुड़ जाता है। उन्होंने लोगों से मेडिकल टेस्ट कराने से पहले इस व्यवस्था को समझने की अपील भी की। राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच रेफरल इंसेंटिव का एक अनौपचारिक नेटवर्क बन गया है। उनका आरोप था कि कई मामलों में मरीज के इलाज से ज्यादा महत्व इस बात को दिया जाता है कि उसे किस डॉक्टर ने किस लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर में भेजा है।

बीजेपी सांसद ने दावा किया कि कई जगह डॉक्टरों को हर रेफरल पर तय कमीशन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अलग एजेंट भी काम करते हैं और यह पूरी तरह एक समानांतर इंसेंटिव इकोनॉमी का रूप ले चुका है। चड्ढा ने कहा कि डॉक्टर इसे रेफरल कमीशन कहते हैं, जबकि डायग्नोस्टिक सेंटर अपने खातों में इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाते हैं। उन्होंने कहा ‘इस कमीशन का पैसा मरीजों से ही वसूला जाता है। कई मामलों में मेडिकल जांच और प्रक्रियाओं की लागत पर अतिरिक्त रकम जोड़ दी जाती है। कुछ जगहों पर डायग्नोस्टिक सेंटर डॉक्टरों को विदेश यात्राएं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं।

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