सीएम योगी ने आगे कहा, “पहली बार ऐसा हुआ है, जब आंगनवाड़ी केंद्र अब हमारे देखने लायक बन रहे हैं। हमने एक मॉडल दिया है कि आंगनवाड़ी केंद्र ऐसे होने चाहिए। एक आंगनवाड़ी केंद्र के निर्माण और उसके रिनोवेशन में हम खर्च कर रहे हैं। मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र कैसा होना चाहिए, यह देखना चाहिए। आज आंगनवाड़ी बहनों के पास अपना स्मार्टफोन है। स्मार्टफोन से वे रियल टाइम डेटा अपलोड कर सकती हैं। यही नहीं, अब आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जो पोषाहार वितरित हो रहा है, उसमें हॉट मील भी है। साथ-साथ टीएचआर के माध्यम से पैक्ड सामग्री भी वितरित होती है। टीएचआर के 204 प्लांट उत्तर प्रदेश के अंदर लग चुके हैं। महिला स्वयं सहायता समूह इन कार्यों को स्वयं संचालित करते हैं। आज यह मॉडल देखने को मिल रहा है और इस मॉडल को मैं मानता हूं कि यह आज की आवश्यकता है।उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति देखी होगी। याद करिए, तब ज्यादातर आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हालत में थे और वहां गंदगी रहती थी। उत्तर प्रदेश के अंदर उस समय आंगनवाड़ी केंद्रों में कोई व्यवस्था नहीं थी। समय पर कोई भी रेसिपी उपलब्ध नहीं हो पाती थी। परिणाम क्या था? जब मैं 2017 में आया तो मैंने पूछा- आखिर ये क्या स्थितियां हैं? आंगनवाड़ी केंद्रों की इतनी खराब स्थिति क्यों है? इतनी शिकायतें क्यों आती हैं? तब पता चला कि आंगनवाड़ी केंद्रों में जो पोषाहार जा रहा था, उसकी सप्लाई एक शराब माफिया कर रहा था। मैं भौचक्का था। हमने इसकी गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए और उस पर सवाल खड़े हुए। मैंने पूछा कि क्या वह हर महीने पोषाहार भेजता है? बताया गया कि नहीं साहब, कभी तीन महीने में एक बार चला जाए तो चला जाए, नहीं तो सब भगवान भरोसे।उन्होंने कहा, “जो बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में जाते थे, वे अपना टाट लेकर जाते थे। वहां न पेयजल की व्यवस्था थी, न बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था और न ही हॉट मिल्क की व्यवस्था थी। गलती करता था कोई और गाली खाती थीं आंगनवाड़ी की बहनें। लखनऊ में बैठकर गलती तो लोग करते थे, लेकिन आपके हिस्से में गाली क्यों आती थी? गाली देने के साथ-साथ, गाली खाने के साथ-साथ अगर थोड़ा मानदेय भी बढ़ा देते तो चलता कि कुछ तो हो रहा है। लेकिन मानदेय भी नहीं मिलता था। मानदेय मात्र ₹3,000 था और सहायिकाओं को ₹1,500 मिलते थे।
आपने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति देखी होगी। याद करिए, तब ज्यादातर आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हालत में थे:सीएम योगी

