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Tue. Aug 18th, 2026
जस्टिस भारतीय डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने शख्स को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। बेंच ने कहा कि दुख के समय दया उसी तरह उचित है, जैसे सुख के समय बारिश के बादल। हमारा कानून इस सिद्धांत को मान्यता देता है। न्याय में कृत्रिमता से ज्यादा उदारता का गुण महत्वपूर्ण है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने जुर्माना न भर पाने की असमर्थता के चलते जेल में रहने को मजबूर आपराधिक मामलों में दोषी एक शख्स को राहत दी है। कोर्ट ने पाया कि शख्स सजा पूरी करने के बाद भी सिर्फ इसलिए डिफॉल्ट में जेल में था, क्योंकि वह जुर्माने की रकम भर पाने में सक्षम नहीं था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी हालत में शख्स का जेल में रहना एक तरह से न्याय का मजाक बनाने जैसा होगा।

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