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महाराष्ट्र में 80 लाख महिलाओं के नाम मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहन योजना से कट गए हैं। ये सभी महिलाएं योजना के लिए अपात्र मानी गई हैं। विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र सरकार पर गंभीर वित्तीय संकट के कारण लाभार्थियों को बाहर करने के आरोप लगाए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी कि ई-केवाईसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर लगभग 1.7 करोड़ हो गई है। महिलाओं के नाम कटने की वजह योजना के मानदंडों का पालन नहीं करने से भी जुड़ा है।जांच में ये भी पता चला है कि योजना का लाभ लेने वाली दो लाख महिलाएं ऐसी हैं जिनके पास चार पहिया वाहन है। 62 लाख महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें 5 महीने का अवसर दिए जाने के बावजूद उन्होंने ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं कराया। ई-केवाईसी की समय-सीमा 3 बार बढ़ाई गई थी। महाराष्ट्र सरकार ने ऐसे सभी लाभार्थियों को लाड़की बहन याेजना से बाहर किया है। फिलहाल पूरे महाराष्ट्र में 1.60 करोड़ महिलाओं को लाड़की बहन योजना को फायदा मिल रहा है।महाराष्ट्र की लाड़की बहन योजना (Ladki Bahin Yojana)  में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के बाद पता चला है कि लाड़की बहन योजना (Ladki Bahin Yojana)  का फायदा पुरुष भी उठा रहे थे। योजना का लाभ लेने के लिए 16 हजार पुरुषों ने महिला के रूप में आवेदन किया था। इस योजना में 74 हजार महिलाएं ऐसे हैं जिनकी आयु 21 वर्ष से कम है। दो लाख महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी आयु 65 वर्ष से अधिक है। 10 लाख महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक है या जो आयकर (IT) रिटर्न भरती हैं। 4.5 लाख महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने बताया कि उनके परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में है।

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