यह घटना बेंगलुरु के एक अपार्टमेंट की है, जहां बीती रात महिला के घर उसके पांच दोस्त आए थे. महिला के मुताबिक, न तो कोई पार्टी थी और न ही तेज़ म्यूज़िक. सभी लोग सिर्फ खाना बना रहे थे और आपस में बातचीत कर रहे थे. तभी एक सोसाइटी सदस्य दरवाजे पर आया और कहा कि “यहां बैचलर्स को रहने की इजाज़त नहीं है.” महिला ने साफ कहा कि वह खुद फ्लैट की मालिक है और यह किसी का निजी मामला है. दरवाजा बंद होते ही बात खत्म होनी चाहिए थी, लेकिन यहीं से विवाद ने गंभीर रूप ले लिया.
महिला के मुताबिक, इसके बाद 4–5 लोग बिना अनुमति उसके लिविंग रूम में घुस आए. उन पर शराब पीने और गांजा पीने के आरोप लगाए गए और अगले दिन फ्लैट खाली करने का आदेश दिया गया. महिला के पुरुष दोस्तों ने हस्तक्षेप कर उन्हें बाहर निकाला. इसी दौरान एक व्यक्ति ने फ्लैट “चेक” करने की कोशिश की, जिस पर हाथापाई हुई. बात बिगड़ने पर सोसाइटी के लोगों ने पुलिस बुला ली. पुलिस ने फ्लैट के कागज़ात दिखाने को कहा, लेकिन महिला ने मना कर दिया क्योंकि कोई अव्यवस्था नहीं थी और घर में सीसीटीवी कैमरे से सब रिकॉर्ड हो रहा था. घटना के बाद महिला ने सोसाइटी और संबंधित बोर्ड मेंबर्स को लीगल नोटिस भेजा. आरोप थे कि अवैध प्रवेश, उत्पीड़न और धमकी. महिला ने सीसीटीवी फुटेज बिल्डर और सोसाइटी चेयरमैन को दिखाई. इसके बाद तुरंत कार्रवाई हुई और आरोपित बोर्ड मेंबर्स को पद से हटा दिया गया. हर सदस्य पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया. महिला ने ₹62 लाख का मुआवज़ा मांगा और साथ ही स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की, ताकि भविष्य में कोई उससे संपर्क न कर सके. वकील ने माना कि पूरी रकम मिलना मुश्किल है, लेकिन आंशिक रकम भी बड़ी जीत होगी. महिला की रेडिट पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर समर्थन की बाढ़ आ गई. यूजर्स ने कहा कि किसी को भी बिना इजाज़त घर में घुसने का हक नहीं है. कई लोगों ने इसे भारत में सिविल कानून के सही इस्तेमाल का उदाहरण बताया. कुछ यूजर्स ने महिला को “बेंगलुरु की डार्क नाइट” तक कह डाला. महिला ने फिलहाल मामले पर और कुछ पोस्ट न करने की बात कही है और कहा है कि अगली सुनवाई के बाद ही अपडेट देगी. फिलहाल, उसकी हिम्मत और कानूनी कदम की हर तरफ सराहना हो रही है.


