Warning: Trying to access array offset on value of type int in /home/u611343930/domains/hindsamarthan.com/public_html/wp-content/themes/newsair/css/dynamic-css.php on line 57

Warning: Trying to access array offset on value of type int in /home/u611343930/domains/hindsamarthan.com/public_html/wp-content/themes/newsair/css/dynamic-css.php on line 58

Warning: Trying to access array offset on value of type int in /home/u611343930/domains/hindsamarthan.com/public_html/wp-content/themes/newsair/css/dynamic-css.php on line 81

Warning: Trying to access array offset on value of type int in /home/u611343930/domains/hindsamarthan.com/public_html/wp-content/themes/newsair/css/dynamic-css.php on line 82
प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने पार्टी से दिया इस्तीफा-यूपी विधानसभा चुनाव से पहले RLD को बड़ा झटका -
Breaking
Wed. Sep 23rd, 2026

प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने पार्टी से दिया इस्तीफा-यूपी विधानसभा चुनाव से पहले RLD को बड़ा झटका

रामाशीष राय ने अपने इस्तीफे में लिखा कि लोकतंत्र “खतरे” में है और उनका यह फ़ैसला वैचारिक और नैतिक कारणों से लिया गया है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह को इस्तीफा सौंपा और इसे सोशल मीडिया पर भी शेयर किया।एनडीए के सहयोगी दल RLD को यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है। दरअसल, RLD के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है .

अपने पत्र में रामाशीष राय ने लिखा, “मैं राजनीति में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़ा था। उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण तथा शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे प्रश्न राष्ट्रीय चिंता के विषय थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने “संपूर्ण क्रांति” का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो स्वप्न देश के सामने रखा था, वह आज भी अधूरा प्रतीत होता है।”

उन्होंने आगे लिखा, “भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है। समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्षरत है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा जनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है। देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए “जाति तोड़ो, समाज जोड़ो” का संदेश दिया था। दुर्भाग्यवश आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग भी उच्च स्थानों पर हैं जो सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित- तीनों के लिए घातक है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *