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उर्दू के प्रति आज के युवाओं में लगन होना जरूरी

उर्दू पत्रकार शाहिद ज़ुबैरी की किताब बातें मुलाकातें का विमोचन

सहारनपुर(हिन्द समर्थन ब्यूरो) सहारनपुर के मशहूर सीनियर उर्दू पत्रकार शाहिद जुबेरी की किताब बातें मुलाक़ातें का दिल्ली में विमोचन किया गया. जिसमें उर्दू अदब से जुड़े कई नामवर लोगों की मौजूदगी रही और उन्होंने जुबेरी द्वारा उर्दू की लगातार की जा रही सेवा को सराहनीय बताया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि पदमश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि जिन लोगों ने अपने जीवन में उर्दू की लगातार सेवा की और आज भी कर रहे हैं उनमें शाहिद जुबेरी का नाम प्रमुखता से शामिल है उन्होंने बहुत ही ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ पत्रकारिता की है और हम उम्मीद करते हैं कि उनका यह जज्बा हमेशा इसी तरह से कायम रहेगा. मशहूर पत्रकार माजिद निज़ामी और सुहेल अंजुम ने भी शाहिद जुबेरी की किताब की तारीफ करते हुए कहा कि यह किताब युवाओं को एक नया रास्ता दिखाने में अहम किरदार अदा करेगी.

प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार सैयद मंसूर आगा ने कहा कि आज उर्दू के प्रति युवाओं में एक सच्ची लगन की जरूरत है तभी उर्दू की हम बेहतर तरह से सेवा कर सकते हैं. किताब के लेखक पत्रकार शाहिद जुबेरी ने इस दौरान अपने पत्रकारिता के अनुभव को सबके सामने रखते हुए मौजूदा दौर की पत्रकारिता पर विस्तार से बात की.

तीन हिंदू परिवारों समेत कई लोगों को जमीयत उलेमा हिन्द ने आर्थिक मदद करते हुए सौंपे एक -एक लाख के चेक

   (हिन्द समर्थन ब्यूरो) 

दिल्ली:देश के मुसलमानो की सबसे बड़ी संस्थाओ में शुमार जमीयत उलेमा हिंद ने कहा कि दंगे होते नहीं हैं, बल्कि कराए जाते हैं और इसके पीछे उन ताक़तों का हाथ होता है, जो नफ़रत के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों को एक दूसरे से अलग कर देना चाहती हैं। आज़ादी के बाद से देश भर में हज़ारों की संख्या में दंगे हो चुके हैं, मगर निराशाजनक बात यह है कि किसी एक दंगे में भी असली दोषी को सज़ा दिलाने की कोशिश नहीं की गई।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने मेवात में ऐसे 22  परिवारों को घर बनाने के लिए जमीनें और 1-1 लाख के चेक दिए, जिनके घरों पर मेवात में हुई हिंसा के बाद बुलडोजर चला दिए गए थे। इन परिवारों में 19 मुस्लिम और 3 हिंदू परिवार शामिल हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने फिरोजपुर झिरका, मेवात में हुए दंगा पीड़ितों के लिए जमीन और एक-एक लाख रुपये दिए।कार्यक्रम में मौलाना मदनी से एक लाख रुपये की राशि का चेक लेने के बाद रामपाल (42) ने एक न्यूज़ एजेंसी से कहा कि वह अपनी पत्नी और पांच बच्चों के साथ दूध की घाटी में एक पहाड़ी की तलहटी पर रहते थे, लेकिन जुलाई में हुई हिंसा के बाद प्रशासन ने उनका घर तोड़ दिया।

दिहाड़ी मजदूरी करने वाले रामपाल ने कहा कि उनका कोई कसूर नहीं था, फिर भी प्रशासन ने उन्हें बेघर कर दिया और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

वहीं, 28 वर्षीय जोगिंदर ने कहा कि कुछ महीने पहले हुई हिंसा के बाद उनका घर प्रशासन ने बिना नोटिस दिए तोड़ दिया था और आज उन्हें एक लाख रुपये मिले हैं।