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इंटरव्यू : सांची भोयर (बिंदी) कलर्स के नए माँ-बेटी के ड्रामा ‘बिंदी’ से सांची भोयर कहती हैं, “यह किरदार मेरी माँ को समर्पित है -
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इंटरव्यू : सांची भोयर (बिंदी) कलर्स के नए माँ-बेटी के ड्रामा ‘बिंदी’ से सांची भोयर कहती हैं, “यह किरदार मेरी माँ को समर्पित है

1. शो के बारे में बताइए?
A. बिंदी एक छोटी लड़की की कहानी है, जिसने अपनी माँ काजल के साथ जेल के अंदर ही बचपन बिताया। उसके लिए जेल कभी डरावनी नहीं लगी, क्योंकि उसकी माँ का प्यार उसे घर जैसा एहसास देता था। लेकिन एक दिन काजल (मैया), जो कानून का पालन करती है, मजबूर होकर बिंदी को खुद से दूर भेज देती है। तब बिंदी को एक बड़ा सच पता चलता है – उसके अपने पिता ने ही उसकी माँ के साथ धोखा किया और माफिया डॉन दयानंद का साथ दिया। अब बिंदी का सपना है पढ़ाई करके खुद को मज़बूत बनाना और अपनी माँ को आज़ाद कराना। लेकिन उसके पिता और दयानंद हर कदम पर उसे रोकने की कोशिश करते हैं। यह बिंदी की लड़ाई है – अपनी माँ को बचाने की और यह साबित करने की कि एक छोटी लड़की भी बेहद साहसी हो सकती है।

2. अपने किरदार के बारे में बताइए?
A. बिंदी जेल के सबसे अंधेरे कोनों में चमकती धूप जैसी है, जो अपनी मैया की पूरी दुनिया बन गई है। वह होशियार है, दयालु है, थोड़ी भोली भी है, लेकिन उसे एहसास नहीं है कि जेल की दीवारों से बाहर की ज़िंदगी और भी कठिन हो सकती है। उसके सपने बहुत साधारण हैं – एक सामान्य परिवार पाना, अपनी माँ के साथ वक्त बिताना, अपनी माँ को जेल से बाहर देखना और पढ़ाई का मौका पाना। जब अचानक वह अपनी माँ से जुदा हो जाती है, तो टूट जाती है, लेकिन हार मानने के बजाय हिम्मत और दयालुता से लड़ने का फैसला करती है। बिंदी का साहस, दया और हार न मानने की जिद ही मुझसे सबसे ज़्यादा जुड़ी और इस किरदार को निभाना मेरे लिए बेहद खास बना।
3. यह आपका पहला हिंदी टीवी रोल है। इतने मज़बूत किरदार का भावनात्मक बोझ उठाना आपके करियर के इस पड़ाव पर कैसा लग रहा है?

A. यह बहुत रोमांचक है। हिंदी टेलीविजन में नए चेहरे के तौर पर कलर्स पर लीड रोल मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसका मतलब है कि टीम ने मुझ पर भरोसा किया कि मैं बिंदी को निभा सकती हूँ। मुझे लगता है कि मैं सिर्फ एक कहानी ही नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी उठा रही हूँ – उन छोटे दर्शकों की, जो खुद को बिंदी में देख सकते हैं। एक अभिनेता के तौर पर मैं बहुत कुछ सीख रही हूँ। निजी तौर पर, यह रोल मेरी माँ को समर्पित है, जो बिल्कुल काजल जैसी हैं।
4. सांची, मराठी टीवी में ‘इंद्रायणी’ से दिल जीतने के बाद अब ‘बिंदी’ के साथ हिंदी टीवी में आ रही हैं। आपके लिए यह अनुभव कितना अलग है?
A. मराठी टीवी से मुझे इंद्रायणी के लिए पहचान और प्यार मिला। हिंदी में सबकुछ नया और रोमांचक लग रहा है। शूटिंग की प्रक्रिया तो वही है, लेकिन कहानी बिल्कुल अलग और ताज़ा है। सबसे बड़ा फर्क यह है कि अब और भी ज़्यादा लोग मुझे देख पाएंगे। मुझे उम्मीद है कि दर्शक बिंदी को भी इंद्रायणी की तरह प्यार देंगे।

5. बिंदी दयालुता के साथ लड़ाई लड़ती है। आपको क्या लगता है, आज की युवा पीढ़ी इस गुण से कैसे जुड़ पाएगी?
A. बिंदी यह दिखाती है कि दयालु होना बिल्कुल मुफ़्त है और ज़िंदगी की मुश्किलों से भी दयालुता के ज़रिए निपटा जा सकता है। आज की युवा पीढ़ी ज्यादा संवेदनशील और सामाजिक रूप से जागरूक है, इसलिए मुझे लगता है कि वे इस भावना से जुड़ेंगे और दयालुता को कमजोरी नहीं मानेंगे।

6. उस बेटी का किरदार निभाना, जिसकी दुनिया माँ से बिछुड़ने पर बिखर जाती है, आपके लिए सबसे कठिन चुनौती क्या रही?

A. जुदाई के सीन सबसे कठिन रहे। मैं खुद अपनी माँ से बहुत करीब हूँ, इसलिए एक बच्चे को माँ से दूर होते हुए सोचना भी मेरे लिए बेहद दर्दनाक था। इसने मुझे उन बच्चों के बारे में सोचने पर मजबूर किया, जो टूटे हुए परिवारों या अनाथालयों में बड़े होते हैं और जिनका दर्द दुनिया नहीं देख पाती।

7. आप एक ऐसी बेटी का किरदार निभा रही हैं जो जेल में पैदा हुई। इस किरदार को समझने का सबसे कठिन हिस्सा क्या रहा?

A. सबसे मुश्किल हिस्सा उस बचपन की कल्पना करना था, जो मेरी ज़िंदगी से बिल्कुल अलग है। बिंदी के लिए जेल की दीवारें सामान्य हैं, और आज़ादी ही उसके लिए अजनबी है। मुझे बार-बार खुद को यह याद दिलाना पड़ता था कि जिन चीज़ों को हम सामान्य मानते हैं – जैसे खेल का मैदान, दोस्त बनाना या बाहर घूमना – वे उसके लिए विलासिता जैसी हैं, जो उसने कभी देखी ही नहीं। उसकी माँ और मासी ने जेल की दीवारों के बीच उसके लिए एक खुशनुमा माहौल बनाने की कोशिश की।

8. बिंदी शिक्षा के ज़रिए अन्याय से लड़ती है। आपके हिसाब से यह संदेश युवाओं के लिए कितना प्रासंगिक है?

A. यह बहुत ही प्रासंगिक है। हमारे देश में बहुत से युवा गरीबी, असमानता और भेदभाव के खिलाफ लड़ रहे हैं, और उनके पास एकमात्र हथियार है – शिक्षा। बिंदी इस सच्चाई को पर्दे पर उतारती है। वह हर बच्चे को यह संदेश देती है – तुम्हारा पेन, तुम्हारी किताबें और तुम्हारा ज्ञान तुम्हारी किस्मत बदल सकते हैं। यह बहुत सशक्त संदेश है।
9. दर्शकों के लिए आपका क्या संदेश है?
A. मैं चाहती हूँ कि हर कोई बिंदी की यात्रा का हिस्सा बने – यह एक कहानी है जो माँ के प्यार और बेटी के साहस का जश्न मनाती है। यह भावनात्मक है, प्रेरणादायक है और आपको परिवार के रिश्तों के प्रति और गहरी इज़्ज़त के साथ छोड़ेगी। 17 सितम्बर को इसका प्रीमियर देखिए और फिर हर रोज़ रात 8:30 बजे सिर्फ कलर्स और जियोहॉटस्टार पर।

माँ के बेइंतहा प्यार और बेटी के योद्धा जैसे जज़्बे की गवाह बने ‘बिंदी’; प्रीमियर 17 सितम्बर को, उसके बाद हर रोज़ रात 8:30 बजे सिर्फ कलर्स पर।

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