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यह संगीतमय संध्या वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी, संगीतकार और लेखक राजेश धाबरे द्वारा प्रस्तुत की गई थी

प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने रूह ए रफी कार्यक्रम में रफी साहब को किया याद

मुंबई(शिब्ली रामपुरी) बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि यह मेरी बदक़िस्मती है कि मैं उस समय गीत नहीं लिखता था जब रफी साहब इस संसार में थे काश मैं गीत लिखता और रफी साहब उन गीतों को अपनी आवाज देते.
जावेद अख्तर ने मुंबई में आयोजित रूह ए रफ़ी कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए यह विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि रफी साहब की सादगी की दूसरी मिसाल नहीं मिलती वह एक बेहतरीन इंसान थे और जहां तक उनकी गायकी की बात है तो उनकी गायकी की तारीफ शब्दों में नहीं की जा सकती वह इतने अच्छे सिंगर थे.
जावेद अख्तर ने कहा कि रफी साहब की आवाज की खूबसूरती थी कि वह जिस भी अदाकार के लिए गाते थे तो ऐसा लगता था कि जैसे वह अदाकार खुद गा रहा हो. मुंबई में यह कार्यक्रम काफी देर तक चला और आवाज के जादूगर रफी साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम में उनके द्वारा गाए गए कई गीत प्रस्तुत किए गए. प्रसिद्ध संगीतकार वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी लेखक और परिवर्तन प्रशिक्षक राजेश धाबरे द्वारा महान गायक रफी साहब को गीतों के माध्यम से श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई.

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