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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषसिद्धि के 42 साल बाद करीब 100 वर्षीय एक व्यक्ति को आरोपों से बरी कर दिया है. इस व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. हाई कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक अपील लंबित रहना और काफी उम्र होना, राहत देते समय प्रासंगिक है. अपीलकर्ता के वकील ने दलील दी कि उसके मुवक्किल की आयु करीब 100 वर्ष हो चुकी है और उसकी भूमिका केवल दो भाइयों की झड़प में हत्या करने की उकसाने की थी.

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