मुंबई (दानिश खान)भारत विविध संस्कृतियों और भाषाओं से समृद्ध देश है, जहाँ अनेक त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। लेकिन एक ऐसा पर्व है जो पूरे देश को एक सूत्र में बाँधता है गणतंत्र दिवस, जो राष्ट्र का पर्व है। यह वह दिन है जब हम उन सभी वीरों को स्मरण करते हैं जिन्होंने भारत और उसके नागरिकों के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
बालाजी टेलीफिल्म्स का नव-प्रस्तुत ऐप कुटिंग्ग इस वर्ष गणतंत्र दिवस को उन कहानियों के माध्यम से मना रहा है, जो साहस, त्याग और न्याय की अडिग भावना को सम्मान देती हैं। गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों और ऐतिहासिक न्यायिक मामलों से लेकर राष्ट्रीय गौरव से प्रेरित आधुनिक अभियानों तक, ये प्रभावशाली फ़िल्में और वेब-सीरीज़ देशभक्ति के विविध स्वरूपों को दर्शाती हैं। लंबे अवकाश के दौरान देखने के लिए उपयुक्त यह वॉचलिस्ट इस बात की सशक्त याद दिलाती है कि राष्ट्र की सेवा का वास्तविक अर्थ क्या है।
*बोस: डेड/अलाइव*
यद्यपि हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस और राष्ट्र के लिए उनके योगदान के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, किंतु उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है। *बोस: डेड/अलाइव* नेताजी के अचानक लापता होने के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के साहसिक प्रयास को दर्शाती है। राजकुमार राव के प्रभावशाली अभिनय से सजी यह श्रृंखला देशभक्ति, विद्रोह और बलिदान जैसे विषयों पर पुनः विमर्श को प्रेरित करती है, और इतिहास व राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी एक प्रेरणादायक गणतंत्र दिवस प्रस्तुति बनती है।
*द टेस्ट केस*
*द टेस्ट केस* भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेस में एक महिला अधिकारी की संघर्षपूर्ण और प्रेरक यात्रा को प्रस्तुत करती है। दृढ़ता, अनुशासन और देशप्रेम से ओत-प्रोत यह श्रृंखला राष्ट्र की सेवा के लिए किए जाने वाले व्यक्तिगत और पेशेवर बलिदानों को उजागर करती है। यह साहस और संकल्प की कहानी है, जो भारतीय सशस्त्र बलों के बदलते स्वरूप को प्रतिबिंबित करती है।
*द वर्डिक्ट: स्टेट बनाम नानावटी*
भारत के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक न्यायालयीन मुकदमों में से एक पर आधारित *द वर्डिक्ट: स्टेट बनाम नानावटी* एक नवगठित गणराज्य में न्याय, नैतिकता और कानून के शासन की गहन पड़ताल करती है। सशक्त अभिनय और सटीक कथानक के माध्यम से यह श्रृंखला दर्शाती है कि किस प्रकार भारत की न्यायिक व्यवस्था ने उसकी लोकतांत्रिक पहचान को आकार दिया।
*एम-ओ-एम: मिशन ओवर मार्स*
यद्यपि मंगल ऑर्बिटर मिशन के बारे में हम सभी समाचारों के माध्यम से जानते हैं, *एम-ओ-एम: मिशन ओवर मार्स* उस वैज्ञानिक प्रतिभा, सामूहिक प्रयास और अदम्य साहस को उजागर करती है, जिसने असंभव को संभव बनाया। यह ISRO के उन गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने सिद्ध किया कि महत्वाकांक्षा और नवाचार की कोई सीमा नहीं होती। यह वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी उपलब्धि का गर्वपूर्ण चित्रण है।
*कोड एम*
*कोड एम* सैन्य न्याय प्रणाली की जटिलताओं में गहराई से उतरते हुए एक सेना मुठभेड़ मामले के पीछे छिपे तथ्यों को उजागर करती है। देशभक्ति को केंद्र में रखते हुए, यह श्रृंखला सम्मान, कर्तव्य और वर्दीधारियों के समक्ष आने वाली नैतिक दुविधाओं की पड़ताल करती है। तीव्र और प्रभावशाली कथानक के साथ, यह गणतंत्र दिवस के अवसर पर देखने योग्य एक सार्थक प्रस्तुति है, जो राष्ट्र सेवा पर प्रश्न भी उठाती है और उसका सम्मान भी करती है।


