मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि देव भक्ति और देशभक्ति थोड़ा अलग-अलग दिखता है। इसलिए दो शब्द प्रयोग में लाते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है हमारे देश में भारत में यह दो अलग नहीं है। एक ही बात है, जो वास्तविक भक्ति करेगा वह देश की भी भक्ति करेगा। जो प्रमाणिकता से देशभक्ति करेगा उसे भगवान देव भक्ति भी करवा लेंगे, यह तर्क नहीं है अनुभव है ऐसा होता है। सीधे-साधे सरल कठिन अनेक प्रकार के रास्ते हैं, मनुष्य के, लेकिन जाना सबको एक ही जगह है।आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में अध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ़ लिविंग द्वारा आयोजित महा रूद्र पूजा में कहा कि हम विश्व को नया रास्ता दिखाएंगे। विश्व हमको गुरु कहेगा, लेकिन हम विश्व को मित्र कहेंगे। महाशक्ति वगैरा नहीं बनेंगे, जैसे आजकल महाशक्तियां हैं। हम क्या करेंगे दुनिया को प्रमाणिकता से संपूर्ण जगत की निरपेक्ष सेवा करेंगे।


