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दोनों को 10 दिन के भीतर फ्लैट खाली करने का निर्देश

मुंबई:ट्राइब्यूनल कोर्ट के आदेश का डेढ़ साल बाद भी जब अमल नहीं हुआ, तो बुजुर्ग दंपती ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका के अनुसार, बुजुर्ग ने 2002 में खारघर में फ्लैट खरीदा था। फ्लैट के लिए पिता ने बेटे के साथ संयुक्त रूप से लोन लिया था, लेकिन बेटे ने लोन की रकम का भुगतान नहीं किया। उलटे बेटे ने पत्नी के साथ मिलकर बुजुर्ग दंपती को यातना देना शुरू कर दिया। पारिवारिक कलह से त्रस्त बुजुर्ग दंपती ने ट्राइब्यूनल शरण ली।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने माता-पिता को परेशान करने वाले बेटे-बहू को घर के बाहर का रास्ता दिखाया है। दोनों को 10 दिन के भीतर फ्लैट खाली करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह निर्देश 70 वर्षीय बुजुर्ग दंपती की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। कोर्ट ने कहा है कि यदि बेटे-बहू तय अवधि में घर खाली नहीं करते है, तो सीनियर सिटीजन ट्राइब्यूनल के आदेश को कड़ाई से लागू किया जाए, जिसमें बेटे-बहू को जेल भेजने तक का निर्देश दिया गया है, जबकि अपीलेट ट्राइब्यूनल को बेटे-बहू की अर्जी पर 6 सप्ताह में निर्णय लेने को कहा गया है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस फिरदोश पुनिवाला की बेंच के सामने बुजुर्ग दंपती की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान बेंच ने पाया कि बेटे ने ट्राइब्यूनल के आदेश को अपीलेट ट्राइब्यूनल के पास चुनौती दी है। इसलिए घर खाली करने के आदेश पर अमल नहीं हुआ है। इस पर बेंच ने उपरोक्त निर्देश दिया।

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