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हम रोज़ कुछ छोटा लेकिन अच्छा कर सकते हैं,” कहती हैं भूमिका चावला -
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Tue. Aug 18th, 2026

हम रोज़ कुछ छोटा लेकिन अच्छा कर सकते हैं,” कहती हैं भूमिका चावला

मुंबई(दानिश खान)बॉलीवुड फिल्मों जैसे तेरे नाम, रन, दिल ने जिसे अपना कहा, फैमिली और एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी से सभी के दिलों में जगह बनाने वाली अभिनेत्री भूमिका चावला आज भी फिल्मों के साथ-साथ सामाजिक कामों पर ध्यान देती हैं। जल्द ही वह अरबाज़ खान के साथ फिल्म केसर में दिखाई देंगी। उनका मानना है कि जिम्मेदारी सिर्फ प्रसिद्ध होने के बाद नहीं आती, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की सोच और आदतों से शुरू होती है।

 

भूमिका बताती हैं कि उन्हें कई मुद्दों की चिंता होती है — जैसे बच्चों की शिक्षा, पर्यावरण का नुकसान, बुजुर्गों की अकेलापन, महिलाओं को बराबरी का अवसर न मिलना, मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याएँ और तंबाकू व शराब जैसी चीज़ों की आसानी से उपलब्धता। वह सवाल करती हैं, “जब सबको पता है कि यह हानिकारक है और कई जगहों पर बैन भी है, तो यह फिर भी बिकता क्यों है? सरकार इसे पूरी तरह रोक क्यों नहीं देती?”

 

उनका मानना है कि बदलाव हमेशा बड़ा काम करके ही नहीं आता। वह कहती हैं, “हम रोज़ कुछ छोटा लेकिन अच्छा कर सकते हैं — पक्षियों और जानवरों को खाना देना, पेड़ लगाना, किसी बच्चे, बुजुर्ग या अकेले व्यक्ति से दो मिनट बात करना, साफ-सफाई रखना — ये छोटी बातें भी महत्वपूर्ण होती हैं।”

 

बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण को देखते हुए वह मानती हैं कि हमें त्योहार मनाने का तरीका भी बदलना चाहिए। वह कहती हैं कि हर परिवार को पटाखों की मात्रा सीमित रखनी चाहिए और जरूरत से ज्यादा खर्च सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए। “सिर्फ इसलिए कि कोई ज्यादा पटाखे खरीद सकता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह जरूरत से ज्यादा जलाए,” उन्होंने कहा।

 

भूमिका मानती हैं कि मूर्तियों का आकार या सजावट का दिखावा कोई प्रतियोगिता नहीं बनना चाहिए। वह पूछती हैं, “हम यह हर साल करते हैं… लेकिन अपनी धरती का क्या हाल कर रहे हैं?”

 

वह कहती हैं कि सामाजिक मुद्दों पर बात सिर्फ खास दिनों पर नहीं, बल्कि नियमित रूप से होनी चाहिए। “जो चेहरे मशहूर हैं और जिन्हें लोग फॉलो करते हैं, उन्हें इस जिम्मेदारी को उठाना चाहिए — चाहे वह स्वास्थ्य, शिक्षा, सरल जीवन या जागरूकता हो। उन्हें ज्यादा बार ऐसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए,” वह कहती हैं।

 

सोशल मीडिया पर भूमिका का नजरिया स्पष्ट है— “सोशल मीडिया अच्छा है या बुरा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कौन और कैसे इस्तेमाल कर रहा है। कभी-कभी सिर्फ पोस्ट करना और असल में कुछ न करना असर कम कर देता है। कभी-कभी बस काम करना जरूरी होता है,” वह मुस्कुराते हुए कहती हैं।

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