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Thu. Aug 6th, 2026
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दिल्ली :जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें “बुलडोज़र न्याय” पर पाबंदी लगा दी है और कहा है अपराधी या आरोपी होने की वजह से किसी का घर नहीं गिराया जा सकता। यह फैसला जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दाखिल की गई अर्ज़ी (295/2022) पर आया है। मौलाना मदनी ने इसे कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

मौलाना मदनी ने कहा, “जब दिल्ली में बुलडोज़र की तैयारी हो रही थी, तो हमने एक रात में अर्ज़ी तैयार करके सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। आज हमारे वकीलों को सफलता मिली है, और हमें उम्मीद है कि जिन सरकारों ने बेघर लोगों के घर तोड़ने का काम किया है, वे अपने रवैये पर पुनर्विचार करने पर मजबूर होंगी।”

उन्होंने कहा कि उन सभी लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए, जिनकी संपत्तियाँ बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के ध्वस्त की गईं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हमेशा न्याय और संविधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई है, और इस फैसले के बाद हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है कि हम इस उद्देश्य के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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